हृदयेश पुरस्कार संस्थान' एवं 'सृजन सारथी' के संयुक्त तत्वावधान में 'गृह-गोष्ठी' कार्यक्रम का हुआ आयोजन

हृदयेश पुरस्कार संस्थान' एवं 'सृजन सारथी' के  संयुक्त तत्वावधान में 'गृह-गोष्ठी' कार्यक्रम का हुआ आयोजन

निष्पक्ष जन अवलोकन

 प्रमोद सिन्हा

गाज़ीपुर 'हृदयेश पुरस्कार संस्थान' एवं 'सृजन-सारथी' के संयुक्त तत्वावधान में 'गृह-गोष्ठी' कार्यक्रम के अन्तर्गत 'गाजीपुर के महावीर प्रसाद द्विवेदी' उपमा से उपमित साहित्यकार श्रीकृष्ण राय हृदयेश के नखास स्थित 'गौतम आश्रम' पर एक 'सरस काव्यगोष्ठी' का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ समस्त कवियों के द्वारा माॅं वीणापाणि के चरणों में दीप-प्रज्वलन एवं पुष्पार्चन के उपरान्त महाकवि कामेश्वर द्विवेदी की वाणी-वंदना से हुआ।तदुपरांत हृदयेश जी की नतिनी एवं इस कार्यक्रम की आयोजिका विदुषी डॉ. ऋचा राय ने समस्त कवियों एवं श्रोताओं का वाचिक स्वागत कर हृदयेश जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर सारगर्भित व्याख्यान देते हुए हिन्दी साहित्य में उनके महत्तर अवदान को रेखांकित किया। काव्यपाठ के क्रम में नवगीतकार डाॅ.अक्षय पाण्डेय ने नववर्ष पर अपना नवगीत "ऑंसू का एक स्वाद/एक रंग रक्त का/युद्धों ने चेहरा बदरंग किया/वक्त का/गया किन्तु करके भयभीत गया/और एक वर्ष आज बीत गया।" सुनाकर खूब वाहवाही अर्जित की। व्यंग्य-कवि अनिल कुमार सिंह 'अनिलाभ' ने "जो लोग मेरा रोज़ हाल पूछ रहे थे/उनको पता नहीं है क्या? रहता कहाॅं हूॅं मैं।" प्रस्तुत कर सोचने पर बाध्य किया। भोजपुरी-हिन्दी के श्रेष्ठ गीतकार हरिशंकर पाण्डेय ने अपना गीत "अधिकारी बन बहुत जी लिये/पुत्र रूप धर आओ तो/राह निहारें बूढ़ी ॲंखियाॅं/उनसे जरा बतियाओ तो।" प्रस्तुत कर अतीव प्रशंसा अर्जित की। नगर के वरिष्ठ कवि,वीररसावतार दिनेशचन्द्र शर्मा ने "ज़मीं पर चाॅंद सितारों की दुनिया बनाने वालों/अंधेरों में भी दिलों से दीपक की लौ जलाना होगा।" प्रस्तुत कर श्रोताओं में ओजत्व का संचार किया। खालिसपुर इण्टर कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य वीरेंद्र सिंह ने अपनी कविता "रउरा के पा के आज ई धरती अघा गइल/ रउरे दरस-परस से ई लोगवा धधा गइल। "सुना कर खूब वाहवाही लूटी। नगर के वरिष्ठ शायर कलीम अख़्तर ने गंगाजमुनी संस्कृति को संबलित करने वाला शेर "नफरतों की ऑंधियाॅं मिटायी जाए/आओ प्रेम का दिया जलाया जाए।" सुना कर खूब तालियां बटोरी‌। अन्त में इस कावय-गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे प्रबन्ध काव्यों के रचयिता वरिष्ठ कवि कामेश्वर द्विवेदी ने नववर्ष पर अपनी छान्दस कविता "मुस्कान बिखेर चतुर्दिक जो कुसुमित नव पुष्प सुगंधित हो/यह पावन वर्ष नया शुभ हो शुभ कर्म निरन्तर वंदित हो।" प्रस्तुत कर खूब प्रशंसित हुए। श्रोता के रूप में हिमांशु राय, अर्जुन सेठ,अंगद शर्मा, संजय वर्मा,श्रवण कुमार जायसवाल, इकरामुद्दीन, याक़ूब,अदिति राय, प्रबुद्ध, शिल्पी,आदि उपस्थित रहे। इस सरस काव्यगोष्ठी की अध्यक्षता महाकवि कामेश्वर द्विवेदी एवं सफल संचालन सुपरिचित नवगीतकार डॉ.अक्षय पाण्डेय ने किया।अन्त में हृदयेश जी की पुत्री गिरिजा राय ने समस्त सहभागी कवि गण एवं आगन्तुक श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया।