इंटरनेट प्रारंभ से आज तक सुरक्षित इंटरनेट दिवस पर विशेष : डा ए के राय
आलेख
आज का युग इंटरनेट का युग है। इसके माध्यम से नई-नई तकनीकी जानकारियाँ लोगों तक तेज़ी से पहुँच रही हैं। संचार क्रांति की कल्पना भी आज इंटरनेट के बिना असंभव है। इंटरनेट आज हमारे जीवन की आवश्यकता और आदत दोनों बन चुका है। इंटरनेट का प्रभाव हमारे निजी, सामाजिक और व्यवसायिक जीवन पर पड़ रहा है। इंटरनेट के माध्यम से जहां हमें काम को शीघ्र करने में आसानी हो रही है, वहीं विश्व के हर क्षेत्र की जानकारियां आसानी से पलक झपकते ही मिल रही हैं। इंटरनेट के माध्यम से अपने कार्य आसान और तेज़ी से पूर्ण कर रहे हैं। बैंकिंग, खरीदारी, डाटा ट्रांसफर, डिजिटल इंडिया जैसे अभियानों की सफलता इंटरनेट पर ही निर्भर है। आज गूगल, याहू और बिंग जैसे सर्च इंजनों के माध्यम से किसी भी जानकारी को पलक झपकते ही प्राप्त किया जा सकता है। इंटरनेट का विचार सर्वप्रथम वर्ष 1960 में अमेरिका के कैलिफ़ोर्निया में विकसित होना शुरू हुआ। इस दिशा में लियोनार्ड क्लाइनरॉक ने 31 मई 1961 को अपने शोध लेख ”इनफार्मेशन फ्लो इन लार्ज कम्यूनिकेशन नेट्स ” के माध्यम से अपने विचार प्रकाशित किए। इसके बाद वर्ष 1962 में “इनफॉरमेशन प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजी ऑफिस” के निदेशक जे.सी.आर. लिकलाइडर ने कंप्यूटरों के आंतरिक नेटवर्क की अवधारणा को आगे बढ़ाया। इन विचारों से प्रेरित होकर रॉबर्ट टेलर ने नेटवर्क निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कई वर्षों के प्रयासों के पश्चात वर्ष 1969 में अमेरिका की मिलिट्री द्वारा विशेष उद्देश्यों के लिए प्रथम नेटवर्क का उपयोग किया गया, जिसे “एडवांस्ड रिसर्च प्रोजेक्ट्स एडमिनिस्ट्रेशन नेटवर्क” नाम दिया गया। बाद में नेशनल साइंस फाउंडेशन ने इसे एन एस एफ नेट नाम दिया और वर्ष 1980 में इसे सामान्य जनता के उपयोग के लिए खोल दिया गया। वर्तमान समय में सेवाओं के आधार पर इंटरनेट को मुख्यतः तीन भागों में विभाजित किया गया है- इसमें पहला सरफेस वेब इंटरनेट का वह भाग है जिसका उपयोग हम रोज़मर्रा में गूगल, याहू और बिंग जैसे सर्च इंजनों के माध्यम से करते हैं। विश्व में सर्वाधिक उपयोग इसी वेब का होता है। इसमें हम केवल वही जानकारी देख सकते हैं जो किसी वेबसाइट का एडमिन हमें दिखाना चाहता है। एडमिन एरिया तक पहुँचना या उसका उपयोग करना आम व्यक्ति के लिए संभव नहीं होता। दूसरा हिस्सा डीप वेब, जिसे इनविजिबल वेब भी कहा जाता है। यह इंटरनेट का वह हिस्सा है जिससे आम लोग लगभग अनभिज्ञ हैं। यह सर्च इंजनों में दिखाई नहीं देता क्योंकि ये “ नो इंडेक्स” वेबसाइट होती हैं। क्लाउड स्टोरेज में सुरक्षित की गई फोटो, वीडियो, फाइलें तथा पासवर्ड-प्रोटेक्टेड वेबसाइटें डीप वेब के अंतर्गत आती हैं। इसका उपयोग सरकारी दस्तावेज़ों, वैज्ञानिक शोध, गोपनीय डाटा संग्रहण और सुरक्षित संचार के लिए किया जाता है। इंटरनेट का तिसरा हिस्सा “डार्क वेब” इंटरनेट का अवैध और गैरकानूनी क्षेत्र है, जहाँ जाने की मनाही है। यहाँ की जानकारी केवल जानकारी उद्देश्य से दी जाती है। डार्क वेब तक पहुँचने के लिए विशेष ब्राउज़र टीओआर (द ओनियनराउटर ) की आवश्यकता होती है। इस वेब का उपयोग नशीली दवाओं के व्यापार, आतंकवाद को वित्तीय सहायता, नकली करेंसी, हैकिंग, वायरस, पायरेटेड सॉफ्टवेयर, कार्डिंग और अवैध गतिविधियों के लिए किया जाता है। यहाँ लेन-देन किसी देश की मुद्रा से नहीं, बल्कि बिटकॉइन के माध्यम से होता है। इस प्रकार इंटरनेट किसी एक देश या व्यक्ति की संपत्ति नहीं है, बल्कि यह कई देशों, संस्थानों, इंजीनियरों और तकनीकी संगठनों के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है। हालांकि इसमें अमेरिकी संस्थाओं की अधिकता के कारण इंटरनेट पर अमेरिका का प्रभाव अधिक माना जाता है। अंतरराष्ट्रीय टेलीकॉम कंपनियां समुद्र के नीचे बिछी ऑप्टिकल फाइबर केबल (सबमैरिन केबल) के माध्यम से देशों को जोड़ती हैं। ये टेलीकॉम कंपनियाँ वेबसाइट और सर्वर के बीच कनेक्शन बनाती हैं और इसके लिए शुल्क लेती हैं। भारत की कंपनियाँ जैसे एयरटेल, जियो, वोडाफोन, आइडिया अंतरराष्ट्रीय टेलीकॉम कंपनियों से डेटा खरीदती हैंं। समुद्र के नीचे बिछी ऑप्टिकल फाइबर केबल (सबमैरिन केबल) के माध्यम इंटरनेट के 99 फिसदी डेटा का आदान-प्रदान इन्हीं केबल्स से होता है, जबकि केवल एक फिसदी सैटेलाइट से। इन केबल्स को संचालित करने वाली कंपनियाँ टीयर वन कहलाती हैं- जैसे स्प्रिंट, आरेंज, एनटीटी, कम्यूनिकेशन टाटा कम्युनिकेशंस। उनसे डेटा खरीदने वाली कंपनियाँ टीयर टू और अंतिम उपभोक्ता तक पहुँचाने वाली कंपनियाँ टियर थ्री होती हैं। इन्हीं के द्वारा हम लोग इंटरनेट का उपयोग कर पाते हैं। इंटरनेट सेवा हमारे जीवन के हर क्षेत्र में उपयोगी है तो वहीं हमें इसके उपयोग में सावधानी बरतने की अत्यंत आवश्यकता है क्योंकि इसका दुरुपयोग करने वाले लोगों की कमी नहीं है। आज साइबर अपराध दुनिया भर में तेजी से बड़े हैं, उससे बचने के लिए हमें इंटरनेट के प्रयोग में विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। इसके लिए आवश्यक है कि इंटरनेट का प्रयोग करते समय हम विशेष सावधानियां बरतें और अपने निजी व व्यवसायिक जीवन या कार्यों की जानकारी किसी अपरिचित को कदापि साझा न करें। वहीं कभी भी अज्ञात नंबरों से आने वाले लिंक पर क्लिक न करें, तथा एटीएम व केवाईसी अपडेट के बहाने आपसे संवेदनशील जानकारी साझा करने के लिए कहें तो ऐसा कदापि न करें। कभी भी अज्ञात नंबरों से आने वाली कॉल्स पर पैसों से संबंधित मांग को पूरा न करें। ऐसे लोगों को अपनी जानकारी जैसे ओटीपी, आधार, पैन या बैंक विवरण ऑनलाइन सझा न करें और सार्वजनिक वाई-फाई का उपयोग करने से बचें। इसके साथ ही लालच में आकर कभी भुगतान प्राप्त करने के लिए क्यू आर कोड स्कैन या ओटीपी पिन साझा न करें क्योंकि यह साइबर क्राइम के तरीके हो सकते हैं। किसी भी प्रकार के साइबर अपराध होने पर इसकी सूचना तत्काल संचारसाथीडाटजीओवीडाटकाम पर दें ताकि साइबर अपराधियों के खिलाफ वैधानिक कार्यवाही की जा सके।