मनरेगा में बड़ा खेल? धुबौलिया और लाइबुढ़वा में सीसी पुलिया निर्माण पर उठे सवाल
निष्पक्ष जन अवलोकन। संवाददाता रुबीना खातून। पचपेड़वा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत धुबौलिया और लाइबुढ़वा में मनरेगा कार्यों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। 3 फरवरी को “निष्पक्ष जन अवलोकन” द्वारा खबर प्रकाशित किए जाने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई। 11 फरवरी को जब मीडिया टीम ने दोबारा स्थलीय निरीक्षण किया तो हालात चौंकाने वाले मिले। ग्राम पंचायत धुबौलिया में लल्लन के खेत के पास बन रही सीसी पुलिया के कार्यस्थल पर एक भी मजदूर मौजूद नहीं मिला, जबकि ऑनलाइन मास्टर रोल में 9 मास्टर रोल पर 58 मजदूरों की उपस्थिति दर्ज पाई गई। मौके पर कच्ची ईंटों और बोलही मिट्टी का प्रयोग दिखा, लेकिन श्रमिकों की अनुपस्थिति ने पूरे कार्य पर सवालिया निशान लगा दिया। ग्रामीणों का कहना है कि “निर्माण कार्य चल रहा है”, परंतु धरातल पर गतिविधि न के बराबर दिखी। इस संबंध में जब वीडियो मोहित दुबे से संपर्क करने की कोशिश की गई तो कई बार कॉल करने के बावजूद संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इससे पारदर्शिता पर और संदेह गहरा गया। इसी तरह ग्राम पंचायत लाइबुढ़वा में भी तस्वीर अलग नहीं रही। यहां 6 मास्टर रोल पर 54 मजदूरों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज थी, लेकिन मीडिया टीम के पहुंचने पर कार्यस्थल पर केवल 6 मजदूर ही काम करते नजर आए। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सुबह फोटो खींचकर कागजी खानापूर्ति की जाती है और वास्तविक काम न के बराबर होता है। एपीओ ओमकार पांडे से दूरभाष पर संपर्क करने पर उन्होंने बताया कि वे विकास भवन बलरामपुर में बैठक में हैं और बाद में बात करेंगे। दोबारा संपर्क करने पर कॉल रिसीव नहीं किया गया। लगातार टालमटोल से प्रशासनिक जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न लग रहा है। इन घटनाओं से मनरेगा और सीसी पुलिया निर्माण कार्यों में बड़े पैमाने पर अनियमितता और संभावित भ्रष्टाचार की आशंका गहराती जा रही है। यदि ऑनलाइन उपस्थिति और जमीनी हकीकत में इतना बड़ा अंतर है, तो यह सीधे-सीधे सरकारी धन के दुरुपयोग की ओर इशारा करता है। अब देखना होगा कि संबंधित अधिकारी इन गंभीर आरोपों पर क्या कार्रवाई करते हैं, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।