कानपुर देहात के राजपुर में शटडाउन के बीच दौड़ा करंट,लाइनमैन जिंदगी की लड़ रहा जंग विभागीय लापरवाही पर फूटा गुस्सा,
निष्पक्ष जन अवलोकन।
अंकित तिवारी।
कानपुर देहात के बिजली विभाग की कथित लापरवाही ने गुरुवार सुबह एक संविदा लाइनमैन की जान जोखिम में डाल दी। जैनपुर स्थित 33 केवी विद्युत उपकेंद्र पर शटडाउन लेकर फाल्ट ठीक कर रहे लाइनमैन गुंजन अचानक बिजली सप्लाई चालू होने से गंभीर रूप से झुलस गए। घटना के बाद विभाग की सुरक्षा व्यवस्था और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जबकि साथी कर्मचारियों में भारी आक्रोश व्याप्त है। कैसे हुआ हादसा प्राप्त जानकारी के अनुसार सुबह लगभग 9 बजे गुंजन वैना नलकूप लाइन का फाल्ट ठीक करने के लिए उपकेंद्र पर कार्य कर रहे थे। नियमानुसार उन्होंने पहले शटडाउन लिया था और मौके पर उनके सहयोगी सूरज व प्रदीप भी मौजूद थे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, काम के दौरान अचानक बिना सूचना हाई वोल्टेज सप्लाई चालू हो गई। खंभे पर कार्य कर रहे गुंजन करंट की चपेट में आ गए और बुरी तरह झुलस गए। करंट की चपेट से उनके हाथ सहित शरीर के कई हिस्सों पर गंभीर जलन और चोटें आई हैं। अस्पताल में चल रहा इलाज हादसे के तुरंत बाद साथी कर्मचारियों ने साहस दिखाते हुए गुंजन को नीचे उतारा और तत्काल राजपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उनकी हालत अत्यंत गंभीर देखते हुए जिला अस्पताल रेफर कर दिया, जहां उनका इलाज जारी है। चिकित्सकों के अनुसार गुंजन की स्थिति नाजुक बनी हुई है। उठे गंभीर सवाल इस घटना ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।शटडाउन के बावजूद सप्लाई कैसे चालू हुई। क्या ड्यूटी पर तैनात ऑपरेटर की लापरवाही या आपसी तालमेल की कमी जिम्मेदार है? क्या लाइनमैनों को आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए गए थे? कर्मचारियों में आक्रोश घटना के बाद क्षेत्र के लाइनमैनों में भारी रोष है। कर्मचारियों का कहना है कि विभागीय लापरवाही के चलते आए दिन ऐसे हादसे हो रहे हैं और उनकी सुरक्षा को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने मामले की उच्च स्तरीय जांच कर दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। कार्रवाई की मांग कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं की गई तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। यह हादसा एक बार फिर बिजली कर्मियों की कार्यस्थल सुरक्षा और विभागीय जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा रहा है।