सीमांत गांवों में ‘श्री गुरु गोरक्षनाथ स्वास्थ्य सेवा यात्रा’ 21-22 फरवरी को, 200 चिकित्सक देंगे सेवा
नेशनल मेडिकोज ऑर्गनाइजेशन द्वारा गोरखपुर व भारत-नेपाल सीमावर्ती क्षेत्रों में 110 किमी लंबी ‘श्री गुरु गोरक्षनाथ स्वास्थ्य सेवा यात्रा’ आयोजित होगी। 20 हजार मरीजों को निःशुल्क उपचार का लक्ष्य।
विभव पाठक / ब्यूरो चीफ
निष्पक्ष जन अवलोकन
गोरखपुर। सेवा, समर्पण और सामाजिक उत्तरदायित्व के भाव को साकार करते हुए नेशनल मेडिकोज ऑर्गनाइजेशन (एनएमओ) द्वारा गोरक्ष प्रांत के तत्वावधान में 21 व 22 फरवरी 2026 को भारत-नेपाल सीमावर्ती क्षेत्रों में “श्री गुरु गोरक्षनाथ स्वास्थ्य सेवा यात्रा” का आयोजन किया जा रहा है। इस महत्त्वपूर्ण सेवा अभियान का औपचारिक उद्घाटन 20 फरवरी को विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न होगा।
इस संबंध में गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान बीआरडी मेडिकल कॉलेज के नाक, कान एवं गला रोग विशेषज्ञ डॉ. पी.एन. सिंह एवं डॉ. विभा सिंह ने संयुक्त रूप से विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह यात्रा सीमांत ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी को ध्यान में रखते हुए समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक उपचार, परामर्श और जागरूकता पहुँचाने का एक सशक्त माध्यम बनेगी।
प्रेस वार्ता में अखिलेश्वर धर दूबे, विशेष जैन एवं स्वर्णिमा भी उपस्थित रहे और इस सेवा अभियान को व्यापक जनसमर्थन दिलाने की अपील की।
हर दो किलोमीटर पर निःशुल्क चिकित्सा शिविर
करीब 110 किलोमीटर लंबी इस सेवा यात्रा के दौरान लगभग प्रत्येक दो किलोमीटर पर एक निःशुल्क चिकित्सा शिविर स्थापित किया जाएगा। निचलौल क्षेत्र में 16, नौतनवाँ क्षेत्र में 14 तथा सिद्धार्थनगर जनपद में 28 शिविर लगाए जाने की योजना है। इन शिविरों के माध्यम से लगभग 20 हजार जरूरतमंद मरीजों को निःशुल्क परामर्श, आवश्यक जांच एवं औषधि वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
200 से अधिक चिकित्सक देंगे सेवाएँ
इस महाअभियान में लगभग 200 चिकित्सक, मेडिकल छात्र एवं स्थानीय स्वयंसेवक सक्रिय भूमिका निभाएंगे। दूरस्थ सीमांत क्षेत्रों में, जहाँ स्वास्थ्य सुविधाएँ सीमित हैं, वहाँ यह यात्रा आशा और विश्वास की नई किरण बनकर पहुँचेगी।
डॉ. पी.एन. सिंह ने कहा, “यह केवल चिकित्सा शिविरों का आयोजन नहीं, बल्कि समाज के प्रति हमारी जिम्मेदारी का प्रतिबिंब है।” वहीं डॉ. विभा सिंह ने मीडिया से आग्रह किया कि इस जनकल्याणकारी पहल को अधिकाधिक लोगों तक पहुँचाने में सहयोग करें।
निस्संदेह, सीमांत क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवा का यह विराट अभियान सेवा-भाव, संवेदना और सामाजिक एकजुटता की प्रेरक मिसाल साबित होगा।