नाक में उगा दांत: एम्स गोरखपुर में दो साल के मासूम की दुर्लभ सर्जरी सफल
एम्स गोरखपुर के डॉक्टरों ने क्लेफ्ट लिप से पीड़ित दो साल के बच्चे की नाक में उगे दांत को सफल सर्जरी से निकाला। जानिए इस दुर्लभ चिकित्सा उपलब्धि की पूरी खबर।
विभव पाठक/ब्यूरो चीफ
निष्पक्ष जन अवलोकन
गोरखपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) गोरखपुर के चिकित्सकों ने एक अत्यंत दुर्लभ और जटिल चिकित्सकीय मामले में दो साल के बच्चे की सफल सर्जरी कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। जन्म से कटे होंठ (क्लेफ्ट लिप) की समस्या से जूझ रहे इस मासूम की बाईं नाक में दांत उग आया था, जिसे विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने सुरक्षित रूप से निकाल दिया।
बिहार के भोजपुर जिले निवासी यह दो वर्षीय बच्चा बीते कई महीनों से जबड़े और नाक के आसपास दर्द, बाईं नाक से सांस लेने में परेशानी तथा बार-बार नाक से स्राव की समस्या से परेशान था। परिजन उसे कई अस्पतालों में ले गए, लेकिन कहीं सही निदान नहीं हो सका।
अंततः परिजन एम्स गोरखपुर के दंत रोग विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर एवं ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जन डॉ. शैलेश कुमार के पास पहुंचे। विस्तृत जांच और सीटी स्कैन के बाद सामने आया कि बच्चे की नाक के भीतर दांत मौजूद है। यह स्थिति चिकित्सकीय भाषा में एक्टोपिक टूथ (Ectopic Tooth) कहलाती है, जो अत्यंत दुर्लभ होती है और प्रायः क्लेफ्ट लिप जैसे जन्मजात विकारों से जुड़ी हो सकती है।
डॉ. शैलेश कुमार ने बताया कि बच्चे की कम उम्र और स्थिति को देखते हुए ऑपरेशन की योजना अत्यंत सावधानीपूर्वक बनाई गई। यह सर्जरी पूर्ण बेहोशी (जनरल एनेस्थीसिया) में की गई, जिसमें नाक के भीतर मौजूद दांत को सफलतापूर्वक निकाल लिया गया। ऑपरेशन के बाद बच्चा पूरी तरह स्वस्थ है और अब उसे सांस लेने में कोई परेशानी नहीं हो रही है।
चिकित्सकों के अनुसार, यदि समय रहते इस समस्या का इलाज न किया जाता, तो इससे गंभीर संक्रमण, बार-बार नाक से खून आना, सांस संबंधी विकार और चेहरे के विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता था।
एम्स गोरखपुर की निदेशक एवं सीईओ मेजर जनरल डॉ. (प्रो.) विभा दत्ता को दंत शल्य विभाग द्वारा पूरे मामले की जानकारी दी गई। उन्होंने सफल सर्जरी पर डॉ. शैलेश कुमार एवं उनकी पूरी टीम को बधाई दी और ऑपरेशन के बाद भी नियमित रूप से बच्चे के स्वास्थ्य की जानकारी ली जा रही है। वर्तमान में बच्चा वार्ड में डॉक्टरों की निगरानी में स्वस्थ है।
इस जटिल सर्जरी में दंत विभाग के सीनियर रेजिडेंट डॉ. प्रवीण कुमार, जूनियर रेजिडेंट डॉ. प्रियंका त्रिपाठी, डॉ. सौरभ, डॉ. सुमित शामिल रहे। एनेस्थीसिया विभाग से विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. संतोष शर्मा, डॉ. विजेता वाजपेई, डॉ. आशुतोष तथा नर्सिंग ऑफिसर पंकज देवी, प्रतिभा और दिव्या ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
दंत विभाग के डॉ. श्रीनिवास ने पूरी टीम को इस ऐतिहासिक सफलता पर बधाई दी। यह पूर्वांचल और एम्स गोरखपुर में इतनी कम उम्र के बच्चे में किया गया पहला ऐसा विचित्र ऑपरेशन है। अब तक ऐसे मामलों में मरीजों को दिल्ली या लखनऊ रेफर किया जाता था।
डॉ. शैलेश कुमार ने बताया कि पांच माह पूर्व इसी तरह के एक सफल ऑपरेशन की खबर पढ़कर दिल्ली से इस बच्चे के परिजनों ने एम्स गोरखपुर से संपर्क किया था। समय पर सर्जरी होने से बच्चे के भविष्य में होने वाली चेहरे की विकृति, सांस संबंधी समस्याएं और मानसिक दुष्प्रभाव को टालना संभव हो सका है।
इस दुर्लभ केस रिपोर्ट को अब एक प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल में प्रकाशित करने की तैयारी की जा रही है।
डॉ. शैलेश ने अभिभावकों से अपील की कि बच्चों के चेहरे से संबंधित किसी भी जन्मजात विकृति, दुर्घटना या चोट को नजरअंदाज न करें और ऐसे मामलों में केवल ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जन से ही संपर्क करें, क्योंकि यह इस प्रकार के मामलों के लिए सुपरस्पेशियलिटी विशेषज्ञ होते हैं।