मकर संक्रांति पर प्राचीन मोटेश्वर नाथ मंदिर में खिचड़ी मेले का भव्य आयोजन, 15 से 17 जनवरी तक उमड़ेगा आस्था का सैलाब
मकर संक्रांति पर गोरखपुर के प्राचीन मोटेश्वर नाथ मंदिर में 15 से 17 जनवरी तक खिचड़ी मेले का आयोजन। विशेष पूजा, रुद्राभिषेक और श्रद्धालुओं के लिए पुख्ता व्यवस्था।
विभव पाठक /ब्यूरो चीफ
निष्पक्ष जन अवलोकन
गोरखपुर। पिपराइच क्षेत्र में स्थित प्राचीन मोटेश्वर नाथ मंदिर में मकर संक्रांति के पावन अवसर पर पारंपरिक खिचड़ी मेले का भव्य आयोजन 15 जनवरी से 17 जनवरी तक किया जा रहा है। इस तीन दिवसीय धार्मिक एवं सांस्कृतिक मेले को लेकर श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। दूर-दराज के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में भक्त भगवान भोलेनाथ के दर्शन के लिए मंदिर परिसर पहुंचेंगे और खिचड़ी अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना करेंगे।
मोटेश्वर नाथ मंदिर में खिचड़ी चढ़ाने की परंपरा वर्षों पुरानी मानी जाती है। मकर संक्रांति के दिन भगवान शिव को खिचड़ी अर्पित करने का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से खिचड़ी चढ़ाने से भगवान भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों के सभी कष्ट दूर करते हैं। इसी धार्मिक मान्यता के अनुरूप प्रतिवर्ष खिचड़ी मेले का आयोजन किया जाता है, जो क्षेत्र की आस्था और संस्कृति का प्रतीक बन चुका है।
मंदिर के महंत संतोष गिरी बाबा ने जानकारी देते हुए बताया कि तीन दिवसीय खिचड़ी मेले के दौरान प्रतिदिन विशेष पूजा-अर्चना, रुद्राभिषेक, अभिषेक और भोग अर्पण किया जाएगा। मकर संक्रांति के दिन सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगने की संभावना है। बाबा ने बताया कि मेले के दौरान मंदिर परिसर को भव्य रूप से सजाया गया है, जिससे भक्तों को आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव हो सके।
श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मंदिर प्रशासन द्वारा व्यापक इंतजाम किए गए हैं। स्वच्छता, पेयजल, प्रसाद वितरण और दर्शन व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए विशेष टीमें तैनात की गई हैं। बढ़ती भीड़ को देखते हुए प्रशासन के सहयोग से सुरक्षा व्यवस्था भी चाक-चौबंद की गई है, ताकि श्रद्धालु शांतिपूर्ण और सुरक्षित ढंग से दर्शन कर सकें।
खिचड़ी मेले के दौरान मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में धार्मिक वस्तुओं की दुकानें सजेंगी। पूजन सामग्री, प्रसाद, धार्मिक पुस्तकों, खिलौनों और घरेलू उपयोग की वस्तुओं की दुकानों से मेला क्षेत्र में रौनक बनी रहेगी। इससे स्थानीय व्यापारियों को भी रोजगार और व्यापार का अवसर मिलेगा।
मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे मेले में श्रद्धा, शांति और अनुशासन बनाए रखें। साथ ही स्वच्छता का ध्यान रखते हुए मंदिर परिसर की पवित्रता को बनाए रखने में सहयोग करें। तीन दिनों तक चलने वाला यह खिचड़ी मेला न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं को भी जीवंत बनाए रखने का कार्य करता है।