हजरत अली की जन्म दिन तेरा रजब पर बहेरा सादात में हुआ जश्न

हजरत अली की जन्म दिन तेरा रजब पर बहेरा सादात में हुआ जश्न

हज़रत अली के जन्म दिन तेरा रजब पर बहेरा सादात में हुआ जश्न 

हिंदू शायर शैलेन्द्र अजमेरी ने अली की शान में पढ़े कसीदे

निष्पक्ष जन अवलोकन 

दिव्यांश प्रताप सिंह 

एरायां/ फतेहपुर 4 जनवरी बहेरा सादात में तेरा रजब के मौके पर सारी रात हुई महफिल आप को बताते चलें की तेरा रजब वो दिन है जिस दिन मोहम्मद साहब के दामाद हज़रत अली का जन्म काबे में हुआ था उनके जन्म दिन पर शिया समुदाय सारी दुनिया में केक काट कर जश्न मनाते हैं और मौला अली की शान में महफिल करवा कर कसीदे पढ़ते हैं इसी क्रम में बहेरा सादात के नसीर हुसैन के बड़े इमाम बाड़े में रात भर महफिल हुई जिसमें मौलाना जाबिर अब्बास,मौलाना हसन रज़ा बनारस ने महफिल में हज़रत अली के जन्म दिन पर रौशनी डाली और शायर दानिश लखनवी,शैलेन्द्र अजमेरी,नफीस हल्लौरी, क़क़ार सुल्तानपुरी, ज़फ़र नसीराबादी, ज़फ़र अड़हेरवी,सागर शिकारपुरी, अनवर सैथली, ने अली की शान में कसीदे पढ़े आपको बताते चलें की हजरत अली का जन्म मक्का शहर काबा के अंदर हुआ था और इनकी शहादत कूफे की मस्जिद में 21 रमजान को हुई थी ये वो अली हैं जो मोहम्मद साहब के चचा जात भाई थे और मोहम्मद साहब की बेटी फातमा जहरा से इनकी शादी हुई थी यानि मुसलमानों के रसूल मोहम्मद साहब के दामाद भी थे अली वो ज़ात का नाम है जिनकी हुकूमत में एक भी इंसान भूखा नहीं सोया वो दिन भर मजदूरी करते थे और रात के वक्त अपने पीठ पर रोटी का गट्ठर बांध कर गरीबों में बांटते थे इतना ही नहीं जिस क़ातिल ने हजरत अली को ज़ख्मी और जब उसे गिरफ्तार कर के अली के सामने लाया गया तो अली ने कहा कि इसके हांथ खोल दो और इसके साथ कोई सख्ती न करो क़ातिल प्यास का इज़हार करते हुवे पानी मांगा तो मौला अली हुक्म दिया की इसे शरबत पिलाओ उनकी शराफत देख कर क़ातिल भी तौबा करने लगा और शर्म से पानी पानी हो गया लेकिन कैसे थे वो करबला के मुसलमान जिन्होंने इन्हीं अली के बेटों को करबला में तीन तक प्यासा रखा और फिर शहीद कर दिया इमाम हसन और इमाम हुसैन उसी अली के बेटे हैं और मुसलमानों के उसी रसूल के नवासे हैं जिन्हें मुसलमान अपना रसूल मानते हैं इन्हीं मुसलमानों में से कुछ काफिर मुसलमानों ने करबला में रसूल के नवासे से जंग की और उनके पूरे परिवार को तीन दिन का भूखा प्यासा शहीद कर दिया हजरत अली के बेटों ने अपना भरा घर कुर्बान कर के अपने नाना रसूल अल्ला के दीन को बचा कर डूबते हुवे इस्लाम को बचा लिया आज हज़रत अली के जन्म दिन पर बहेरा सादात में रात भर जश्न मनाया गया और शायरों ने हज़रत अली की शान में कसीदे पढ़ते हुवे अली के जन्म दिन की एक दूसरे को मुबारकबाद पेश की बहेरा सादात की अंजुमन ज़ुल्फेकार हैदरी ने आए हुवे अतिथियों का फूल माला पहना कर स्वागत किया