जमानत से पहले जेल में मौत! रायबरेली जिला कारागार में बंदी की संदिग्ध मौत पर भड़के परिजन, पुलिस-प्रशासन पर लापरवाही के गंभीर आरोप

जमानत से पहले जेल में मौत! रायबरेली जिला कारागार में बंदी की संदिग्ध मौत पर भड़के परिजन, पुलिस-प्रशासन पर लापरवाही के गंभीर आरोप

निष्पक्ष जन अवलोकन 

रायबरेली जिला कारागार में बाइक चोरी के आरोप में बंद एक बंदी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो जाने से हड़कंप मच गया है। मृतक की पहचान उमाशंकर के रूप में हुई है, जो करीब एक माह से जिला कारागार में निरुद्ध था। जमानत से ठीक पहले हुई इस मौत ने पुलिस और जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

परिजनों का आरोप है कि उमाशंकर की तबीयत लगातार खराब थी, लेकिन जेल प्रशासन ने न तो समय पर इलाज कराया और न ही इसकी सूचना परिवार को दी गई। मृतक के भाई कन्हैया लाल ने पुलिस पर फर्जी मामले में जेल भेजने का आरोप लगाते हुए कहा कि जमानत के लिए करीब 80 हजार रुपये खर्च किए जा चुके थे और शुक्रवार को जमानत होनी तय थी। गुरुवार को भी जमानत संभव थी, लेकिन एक जमानतदार कम होने के कारण प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।

परिजनों का कहना है कि यदि पुलिस और जेल प्रशासन ने मानवीय संवेदनशीलता दिखाई होती और समय पर इलाज कराया होता, तो उमाशंकर की जान बचाई जा सकती थी। घटना की जानकारी मिलते ही परिजनों में भारी आक्रोश फैल गया और उन्होंने जेल प्रशासन व पुलिस के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किया।

मृतक के परिजनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने और दोषी पुलिसकर्मियों व जेल अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। वहीं, घटना के काफी समय बाद तक पुलिस और जेल प्रशासन की ओर से कोई ठोस या स्पष्ट बयान सामने नहीं आया, जिससे संदेह और गहराता जा रहा है।

फिलहाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर जेलों में बंदियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य व्यवस्था और पुलिस-प्रशासन की जवाबदेही पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।