बच्चों में सोशल मीडिया की लत के छुटकारे के बड़े केंद्र बन सकते हैं स्कूल...ज्योति बाबा
निष्पक्ष जन अवलोकन। । शिवसंपत करवरिया। चित्रकूट।कानपुर एनुअल स्टेट्स ऑफ़ एजूकेशन रिपोर्ट के सालाना सर्वेक्षण के अनुसार भारत में 14 से 16 वर्ष के करीब 90 फ़ीसदी बच्चों के पास स्मार्टफोन इस्तेमाल करने की सुविधा है इनमें से 76 फ़ीसदी बच्चे स्मार्टफोन का इस्तेमाल सोशल मीडिया के लिए करते हैं ना कि पढ़ने के लिए, उपरोक्त बात नशा मुक्ति युवा भारत अभियान के तहत सोसाइटी योग ज्योति इंडिया के तत्वाधान में आयोजित ई- संगोष्ठी शीर्षक क्या स्मार्टफोन की लत बच्चों को बना रही है मनोरोगी पर अंतर्राष्ट्रीय नशा मुक्ति अभियान के प्रमुख,एशिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्डधारी योग गुरू ज्योति बाबा ने कहीं,ज्योति बाबा ने आगे कहा कि सिर्फ फोन छीन लेना समस्या का समाधान नहीं है क्योंकि इससे बच्चों में चिड़चिड़ापन और विद्रोह की भावना पैदा होती है समझदारी इसी में है कि उस खाली समय को रचनात्मक विकल्पों के जरिए भरा जाए, आप अपने बच्चों को खेलकूद, संगीत,पेंटिंग या उसकी पसंद की किसी अन्य गतिविधियों के लिए प्रेरित कर सकते हैं खुद बच्चों के साथ खेलने के लिए वक्त भी निकाल सकती हैं। ज्योति बाबा ने जोर देकर कहा कि सबसे महत्वपूर्ण और प्रभावी कदम है रोल मॉडलिंग बच्चे व्यवहार से सीखते हैं और यदि घर की महिला और अन्य बड़े सदस्य स्वयं खाली समय में लगातार रील्स स्क्रोल करते रहेंगे तो बच्चों को सोशल मीडिया से दूर करना असंभव होगा। श्री राम राधे पब्लिक स्कूल के प्रबंधक साकेत सिंह ने कहा कि हाल ही में हुए सर्वे के मुताबिक 64% अभिभावकों ने माना कि उनके बच्चों को ऑनलाइन गेमिंग की लत है। डॉक्टर अरुण चंद विद्या निकेतन की निशा सिंह ने कहा कि महिलाओं में सोशल मीडिया के अत्यधिक प्रयोग के चलते तलाक के मामले भी जबरदस्त बढ़ चुके हैं। रामेश्वर प्रसाद इंटर कॉलेज पिपौरी के प्रेम प्रकाश मिश्रा ने कहा कि किसी भी लत को तब तक नहीं छोड़ सकते जब तक उसके लिए स्पष्ट और कड़े नियम ना हो,आप भी इस मामले में अपने घर में नियम कायदे तय कर सकती हैं, मसलन घर में यह नियम बना दें कि खाने की मेज पर और रात में सोते वक्त घर का कोई भी सदस्य मोबाइल का इस्तेमाल नहीं करेगा,सिर्फ आपसी बातचीत करें ना कि स्क्रीन पर बात करें। नेहरू इंटर कॉलेज के वीरेंद्र सिंह ने कहा कि बच्चों को सोशल मीडिया से बचने के लिए माता-पिता खुलकर संवाद करें, इंटरनेट पर उनकी पसंदीदा सामग्री के बारे में जाने और अच्छा व बुरा समझाएं। शिक्षाविद वीके मिश्रा ने कहा कि अमेरिका के डॉक्टर विवेक मूर्ति ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी रिपोर्ट में मूर्ति का दावा था कि 3 घंटे से अधिक समय तक सोशल मीडिया के इस्तेमाल और बच्चों में अवसाद तथा बेचैनी का गहरा संबंध है जिससे बच्चों के दिमाग में गहरा नकारात्मक असर पड़ रहा है। चित्रा इंटर कॉलेज के डॉक्टर सुरेश सचान ने कहा कि जब बच्चे अपने बड़ों को किताबों के साथ या आपस में बातचीत करते हुए देखते हैं तो वह भी स्वाभाविक रूप से इस तरह की गतिविधि करते हैं अनुशासन सबसे पहले आपको खुद में लाना होगा,तभी परिवार का भावी भविष्य सुरक्षित किया जा सकेगा। कामता सेवा संस्थान की मंजू त्रिपाठी ने कहा कि ऑनलाइन गेम्स व सोशल मीडिया के छोटे-छोटे वीडियो कैसे बच्चों को आभासी दुनिया में बंधक बना लेते हैं इसे अखबारों में रोज दुष्परिणामों की प्रकाशित हो रही खबरों से समझा जा सकता है। ई- संगोष्ठी का संचालन प्रोजेक्ट डायरेक्टर उपेंद्र मिश्रा व धन्यवाद शिक्षाविद शोभा मिश्रा ने दिया। संगोष्ठी के अंत में बच्चों को सोशल मीडिया एडिक्शन से बचाने के लिए व्यापक जन आंदोलन चलाने हेतु ज्योति बाबा ने ऑनलाइन संकल्प भी कराया।