पचपेड़वा विकासखंड में मनरेगा में बड़ा खेल! फर्जी ऑनलाइन अटेंडेंस से सरकारी धन की बंदरबांट, गरीब मजदूरों का हक छीना गया

पचपेड़वा विकासखंड में मनरेगा में बड़ा खेल! फर्जी ऑनलाइन अटेंडेंस से सरकारी धन की बंदरबांट, गरीब मजदूरों का हक छीना गया

निष्पक्ष जन अवलोकन। न्यूज़ ब्यूरो पचपेड़वा विकासखंड के कई ग्राम पंचायतों में मनरेगा योजना के तहत बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े और घोटाले का मामला सामने आया है। ग्रामीणों और मौके पर पहुंचे संवाददाताओं के अनुसार ग्राम पंचायतों में ऑनलाइन हाजिरी तो दर्ज की जा रही है, लेकिन कार्यस्थल पर मजदूर दिखाई नहीं दे रहे हैं। आरोप है कि सुबह मजदूरों की जीपीएस और फोटो के माध्यम से ऑनलाइन अटेंडेंस लगाकर उन्हें वापस भेज दिया जाता है, जबकि बाद में बाहर के मजदूरों को ठेके पर बुलाकर कार्य कराया जाता है। इससे असली गरीब मजदूरों को रोजगार नहीं मिल पा रहा है और सरकारी धन का दुरुपयोग हो रहा है। ग्राम पंचायत बसंतपुर में 6 मस्टर रोल पर 55 मजदूरों की ऑनलाइन अटेंडेंस दर्ज की गई, लेकिन जब मीडिया टीम कार्यस्थल पर पहुंची तो एक भी मजदूर मौजूद नहीं मिला। ग्रामीणों ने बताया कि केवल फोटो लेकर हाजिरी भर दी जाती है और बाद में ठेके से काम कराया जाता है। इसी तरह ग्राम पंचायत चौरासी में 10 मस्टर रोल पर 57 मजदूरों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज मिली। ग्रामीणों का कहना है कि फोटो खींचकर हाजिरी लगाने का खेल लगातार चल रहा है। यहां बाहरी ग्राम पंचायतों के मजदूरों से कार्य कराया जाता है जबकि स्थानीय मजदूर बेरोजगार घूम रहे हैं। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि ग्राम पंचायत का सामुदायिक शौचालय बंद पड़ा है, जिससे लोग खुले में शौच करने को मजबूर हैं। ग्राम पंचायत गोबरी में 7 मस्टर रोल पर 51 मजदूरों की ऑनलाइन अटेंडेंस दिखाई गई। ग्रामीणों के अनुसार यहां भी फर्जी फोटो के जरिए उपस्थिति दर्ज कराई जाती है और ठेके पर मजदूर बुलाकर काम कराया जाता है। बताया गया कि इस संबंध में पहले भी 19 मई को खबर प्रकाशित की गई थी, लेकिन अधिकारियों ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की। ग्राम पंचायत बानगढ़ पिपरी में 3 मस्टर रोल पर 28 मजदूरों की ऑनलाइन हाजिरी दर्ज मिली, लेकिन कार्यस्थल खाली मिला। आरोप है कि सुबह फोटो लेकर मजदूरों को छोड़ दिया जाता है और पूरा कार्य ठेकेदारी प्रणाली से कराया जाता है। वहीं ग्राम पंचायत तिलोकपुर में 5 मस्टर रोल पर 31 मजदूरों की ऑनलाइन अटेंडेंस दर्ज की गई। मीडिया टीम जब मौके पर पहुंची तो वहां न मजदूर मिले, न कुदाल, फावड़ा, टोकरी या अन्य कार्य सामग्री दिखाई दी। ग्रामीणों ने इसे मनरेगा में फर्जी खेल बताया। मामले को लेकर संबंधित अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रधान, सचिव, तकनीकी सहायक और संबंधित अधिकारी मिलकर बड़े पैमाने पर मनरेगा घोटाले को अंजाम दे रहे हैं। वीडियो संवाददाता द्वारा संपर्क किए जाने पर संबंधित अधिकारी मोहित दुबे जवाब देने से बचते नजर आए। ग्रामीणों ने उच्च अधिकारियों से निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है, ताकि गरीब मजदूरों का हक उन्हें मिल सके और सरकारी धन की लूट पर रोक लगाई जा सके।