महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम कागजों में चल रहा मनरेगा, धरातल पर नहीं दिखे मजदूर फर्जी हाजिरी और बिना कार्य भुगतान का बड़ा खेल उजागर ग्राम पंचायतों में भ्रष्टाचार का आरोप, जांच की उठी मांग ग्रामीणों ने कहा— मजदूरों के नाम पर हो रहा सरकारी धन का
निष्पक्ष जन अवलोकन। विकासखंड बढ़नी जनपद सिद्धार्थनगर के ग्राम पंचायत बैदौली में सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत उस समय खुलकर सामने आ गई जब मीडिया की टीम मौके पर पहुंची। ग्रामीणों की शिकायत पर पहुंचे संवाददाता ने देखा कि कागजों में मनरेगा के तहत खुदाई कार्य तेजी से चल रहा है, लेकिन कार्यस्थल पर एक भी मजदूर मौजूद नहीं मिला। जबकि ऑनलाइन मास्टर रोल में 8 मास्टर रोल और 28 मजदूरों की उपस्थिति दर्ज दिखाई गई। मौके की तस्वीर कुछ और ही कहानी बयां कर रही थी। ग्रामीणों का आरोप है कि सिर्फ कागजों में काम दिखाकर सरकारी धन का बंदरबांट किया जा रहा है। गांव में जगह-जगह गंदगी का अंबार लगा हुआ मिला। नालियां बजबजा रही हैं, लेकिन सफाई व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त दिखाई दी। पंचायत भवन भी बंद मिला और वहां किसी प्रकार की गतिविधि संचालित नहीं हो रही थी। वहीं सरकार द्वारा लाखों रुपये खर्च कर बनाए गए सामुदायिक शौचालय पर ताला लटका मिला, जिससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखी गई। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि गांव में विकास कार्य केवल कागजों तक सीमित हैं और धरातल पर कुछ भी नजर नहीं आता। मामले की जानकारी लेने के लिए संवाददाता ने ग्राम प्रधान धीरेंद्र गिरी से संपर्क किया तो बातचीत के दौरान प्रधान द्वारा कथित रूप से अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया। आरोप है कि प्रधान ने खुले शब्दों में कहा कि “हम संबंधित अधिकारियों को पैसा देते हैं, इसलिए कोई कार्रवाई नहीं होगी।” इतना ही नहीं, संवाददाता को भी धमकी भरे लहजे में बात करते हुए मौके पर पहुंचने पर आपत्ति जताई गई। प्रधान द्वारा कही गई कुछ बातें इतनी आपत्तिजनक थीं कि उन्हें सार्वजनिक करना भी उचित नहीं समझा जा सकता। इस पूरे मामले ने विकासखंड बढ़नी में चल रहे विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों ने उच्च अधिकारियों से निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर मामले को संज्ञान में लेकर कार्रवाई करते हैं या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।









