फर्जी मनरेगा कार्यों में भ्रष्टाचार का खेल, अधिकारी बने मूकदर्शक

फर्जी मनरेगा कार्यों में भ्रष्टाचार का खेल, अधिकारी बने मूकदर्शक

निष्पक्ष जन अवलोकन। विकासखंड पचपेड़वा जनपद बलरामपुर के ग्राम पंचायत बनगढ़ पिपरी और ग्राम पंचायत गोबरी में मनरेगा कार्यों में बड़े पैमाने पर अनियमितता और फर्जी ऑनलाइन हाजिरी लगाने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रधान, सचिव और संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी धन का खुलेआम दुरुपयोग किया जा रहा है, जबकि गरीब मजदूरों को उनके अधिकार से वंचित किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत बनगढ़ पिपरी में प्रदीप के खेत के पास चल रहे खुदाई कार्य का जब मीडिया टीम ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया तो वहां कोई मजदूर कार्य करता दिखाई नहीं दिया। न ही कोई कार्यस्थल पर मौजूद मिला। इसके बावजूद सरकारी अभिलेखों में तीन मास्टर रोल पर 21 मजदूरों की ऑनलाइन अटेंडेंस दर्ज बताई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि मजदूरों की केवल फोटो खींचकर उन्हें वापस भेज दिया जाता है और बाद में उन्हीं तस्वीरों के आधार पर ऑनलाइन हाजिरी लगाकर मजदूरी निकाली जाती है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि मनरेगा योजना के नाम पर बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा किया जा रहा है। गरीब मजदूरों के नाम पर फर्जी उपस्थिति दर्ज कर सरकारी धन का बंदरबांट किया जा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि मौके पर कोई मजदूर कार्य नहीं कर रहा था तो आखिर ऑनलाइन हाजिरी किस आधार पर दर्ज की गई। इससे पूरे मामले में गंभीर भ्रष्टाचार की आशंका जताई जा रही है। वहीं ग्राम पंचायत गोबरी में भी इसी प्रकार की शिकायतें सामने आई हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार यहां 12 मास्टर रोल पर 82 मजदूरों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज की गई है, जबकि मौके पर केवल कुछ ही मजदूर कार्य करते दिखाई देते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कई लोग शहरों में रहकर भी ग्राम पंचायत से मनरेगा की मजदूरी उठा रहे हैं। साथ ही मजदूरों से वसूली किए जाने की भी चर्चा क्षेत्र में जोरों पर है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रधान, सचिव और संबंधित कर्मचारी मिलकर सरकारी धन का दुरुपयोग कर रहे हैं। आरोप यह भी है कि फर्जी मजदूरी के पैसे का हिस्सा आपस में बांटा जाता है। इससे वास्तविक गरीब मजदूरों को रोजगार नहीं मिल पा रहा है और सरकार की महत्वाकांक्षी योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। बताया जा रहा है कि 19 मई को निष्पक्ष जन अवलोकन द्वारा इस मामले की खबर प्रकाशित की गई थी, लेकिन उसके बाद भी किसी जिम्मेदार अधिकारी द्वारा मौके पर पहुंचकर जांच नहीं की गई। ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद अधिकारी मामले को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। इस संबंध में संवाददाता द्वारा ओमकार पांडे APOसे दूरभाष पर संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि “जब समय मिलेगा तब जाएंगे, काम चल रहा है तो चलने दीजिए।” अधिकारी के इस बयान से ग्रामीणों में आक्रोश है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो सरकारी धन की लूट इसी प्रकार जारी रहेगी। ग्रामीणों और मजदूरों ने जिलाधिकारी सहित उच्च अधिकारियों से मांग की है कि दोनों ग्राम पंचायतों में मनरेगा कार्यों की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए तथा गरीब मजदूरों के हक की रक्षा सुनिश्चित की जाए।