पूर्व विधायक स्व0 मा0 अशर्फी लाल यादव का जीवन दर्शन आज भी है प्रसांगिक

पूर्व विधायक स्व0 मा0 अशर्फी लाल यादव का जीवन दर्शन आज भी है प्रसांगिक

निष्पक्ष जन अवलोकन अजय रावत।। बाराबंकी।।जनपद में समाजवाद का परचम लहराने वाले पूर्व विधायक स्वर्गीय अशर्फी लाल यादव का जीवन संघर्षों से भरा रहा चाहे राजनैतिक क्षेत्र हो अथवा सामाजिक वे अपनी आखिरी सांसो तक समाज के शोषित पीड़ित मजलूमों के हक हकूक की लड़ाई लड़ते रहे। जिनका जीवन दर्शन आज भी लोगों के मध्य प्रसांगिक बना हुआ है। जिला बाराबंकी की अविरल बहने वाली घाघरा नदी के तट पर स्थित सतनामी संप्रदाय के प्रवर्तक बाबा जगजीवन साहब की जन्मस्थली सरदहा नामक गांव में 11 फरवरी 1935 को गरीब परिवार स्वर्गीय राम हर्ष व माता दुलारा देवी के घर जन्मे बालक का नाम अशर्फी लाल रखा गया 8 वर्ष की अल्पायु में ही माता-पिता का साया सिर से हट जाने के बावजूद पढ़ने की ललक कम नहीं हुई और सरदहा गांव से पैदल जाकर किन्तूर के स्कूल से प्राइमरी व रामनगर यूनियन हाई स्कूल से हाईस्कूल तक अध्ययन किया क्षेत्र में कोई विद्यालय न होने की पीड़ा मन मस्तिष्क को झकझोरती रही और एक विद्यालय खोलने का दृढ़ संकल्प लिया और कहा कि जो पीड़ा पढ़ाई के लिए खुद उठाई है वह पीड़ा तराई क्षेत्र व बदोसराय के क्षेत्र के बच्चों को न उठानी पड़े और हर वर्ग के गरीब बच्चों को उचित और सस्ती शिक्षा मिले जिससे पढ़ लिख कर बच्चे नौकरी व अपने को रोजी-रोटी से जोड़ सकें। स्वर्गीय अशर्फी लाल जी पढ़ाई लिखाई में मेधावी व कुशाग्र बुद्धि के थे यदि चाहते तो कोई अच्छी नौकरी कर सकते थे लेकिन अपनी पीड़ा को समाज की पीड़ा मानकर विद्यालय खोलने की धुन में रमे रहे और और सन 1952 में जन सहयोग से कस्बा बदोसराय में जनता जूनियर स्कूल की स्थापना किया जो बाद में हाई स्कूल व वर्तमान मे इंटर कॉलेज है जिसका नाम जनता इंटर कॉलेज बदोसराय है। इस विद्यालय की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की मान्यता से लेकर के पूरे विद्यालय भवन का निर्माण कराया। स्कूल की स्थापना के समय इस विद्यालय में अध्यापन कार्य किया जिससे स्वर्गीय अशर्फी लाल यादव जी को "मास्टर साहब" के नाम की पहचान मिली ।शिक्षा के क्षेत्र में स्वर्गीय अशर्फी लाल यादव जी का यह महत्वपूर्ण योगदान इस क्षेत्र के लोगों के लिए ऋण स्वरूप है । स्वर्गीय अशर्फी लाल यादव जी 1956 में स्वर्गीय रामसेवक यादव जी के संपर्क में आए और समाजवादी आंदोलन से जुड़कर स्वर्गीय रामसेवक यादव जी के सानिध्य में राजनीति शुरू की और फिर डॉक्टर राम मनोहर लोहिया जी के संपर्क में आए स्वर्गीय अशर्फी लाल यादव जी लोहिया जी की विचारधारा से इतने प्रभावित हुए कि समाजवादी विचारधारा को जीवन पर्यन्त धारण किए रहे और समाजवादी विचार धारा के ही होकर रह गए और डॉ राम मनोहर लोहिया जी द्वारा चलाए गए विभिन्न आंदोलनों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और समाजवादी नेता राजनरायन जी, चन्द्र शेखर जी ,जॉर्ज फर्नांडिस, अनन्तराम जायसवाल जैसे मुखर समाजवादी नेताओं के सम्पर्क में रहे और समाजवाद के आंदोलन को गति देते रहे और समय समय पर लोहिया जी द्वारा चलाए गए विभिन्न आंदोलनों सत्याग्रह आदि में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया और जेल गए कई कई महीने जेल में ही रहे और जेल जाने के बावजूद समाजवादी आंदोलन से विमुख नहीं हुए ।स्वर्गीय अशर्फी लाल यादव जी डॉ राम मनोहर लोहिया जी के अनन्य अनुयायी थे डॉक्टर लोहिया जी द्वारा चलाए गए सामाजिक आंदोलन जाति तोड़ो समाज जोड़ो के अभियान में शामिल हुए और दलित के घर खाना खाने के कारण सामाजिक बहिष्कार के दंश को भी झेला । स्वर्गीय अशर्फी लाल यादव सर्वप्रथम बरौलिया न्याय पंचायत से सरपंच निर्वाचित हुए और उसके पश्चात दरियाबाद विधानसभा क्षेत्र को अपनी कर्म भूमि बनाया 1969 का चुनाव दरियाबाद विधानसभा क्षेत्र से लड़ा किंतु सफलता नहीं मिली और 1974 का विधान सभा चुनाव दरियाबाद विधानसभा से स्वयं न लड़कर श्री बेनी प्रसाद वर्मा जी को लड़ाया और पूरे चुनाव प्रचार की बागडोर संभाले रहे और इस चुनाव में बाबू बेनी प्रसाद वर्मा विजयी हुए ।इसी बीच 1975 में आपातकाल घोषित कर दिया गया जिसमें गैर कांग्रेसी नेताओं को जेल में बंद कर दिया गया उसी में अशर्फी लाल यादव जी को भी डी आई आर मीसा के तहत जेल में बंद कर दिया गया और 2 वर्ष की सजा हुईं। आपातकाल खत्म होने के बाद जेल से रिहा किए गए और 1977 में हुए आम चुनाव में दरियाबाद विधानसभा क्षेत्र से जनता पार्टी के टिकट पर विधायक बने मात्र ढाई साल के अल्प कार्यकाल में दरियाबाद विधानसभा क्षेत्र के विकास को गति देने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी भेलसर से टिकैतनगर मार्ग , दरियाबाद से सफदरगंज मार्ग कोटवा सनावा मार्ग ,आदि कई छोटे बड़े मार्गों का निर्माण ,कोटवा धाम कोटवा सड़क मार्ग पर स्थित गाजीपुर का कल्याणी पुल, 13 राजकीय नलकूप, कई प्राइमरी स्कूल का निर्माण कार्य बिना कोई निधि के कराया समाज सेवा की भावना कूट कूट कर भरी थी पुलिसिया और सामंती अन्याय का विरोध आजीवन किया भ्रष्टाचार के विरुद्ध हमेशा भौहें तनी ही रहती स्वर्गीय अशर्फी लाल यादव जी का मानना था कि जुल्म अन्याय को देख कर या सुनकर जिस समाजवादी नेता की आंखों के डोरे लाल ना हो वह असली समाजवादी नहीं हो सकता इसीलिए स्वर्गीय अशर्फी लाल यादव जी का नाम कुजात समाजवादी नेताओं में शामिल रहा पुलिस जुल्म के विरोध की पूरी की पूरी दास्तान है पुलिस द्वारा बदोसराय थाने में किया गया फूलचंद वर्मा हत्याकांड हो अथवा जैदपुर पुलिस द्वारा अमीन मूल चन्द्र यादव हत्या कांड हो इन दोनों मुद्दों को स्वर्गीय अशर्फी लाल यादव जी ने प्रमुखता से उठाया और हत्याकांड में शामिल पुलिस वालों को जेल भेजवाने का काम किया ऐसे ही तमाम उदाहरण पुलिस जुल्म विरोध के मौजूद हैं जो पुराने लोगों की जुबान पर स्वर्गीय अशर्फी लाल यादव जी के संघर्षों की चर्चा होने पर आज भी बरबस आ ही जाते हैं।स्वर्गीय अशर्फी लाल यादव जी राजनीति को सेवा का माध्यम मानते थे उनका मानना था की राजनीति मात्र सेवा का माध्यम है कमाई का साधन नहीं। एक सच्चा राजनेता का धर्म होता है कि लोककल्याणकारी नीतियां निर्धारित करे जिससे सर्वे भवन्तु सुखिन:का भाव प्रस्फुटित हो । स्वर्गीय अशर्फी लाल यादव जी ने जीवन भर राजनीति को सेवा का प्रयाय मानकर दीन दुखियों गरीबों शोषित वंचितों या यह मानिए कि सर्वहारा समाज के लिए संघर्ष किया । समाजवाद की विचारधारा लिए समाजवाद का सजग प्रहरी 16 जनवरी 2015 की सुबह हमेशा हमेशा के लिए चिरनिंद्रा में लीन हो गया।