कहीं शरीर का यह मामूली सा धब्बा आपको अपाहिज न बना दे-ललितपुर में आज से बड़ा अभियान
निष्पक्ष जन अवलोकन। अरविन्द कुमार पटेल। ललितपुर। क्या आपके शरीर पर कोई ऐसा दाग है जिसे छूने पर आपको महसूस नहीं होता? क्या आपके हाथ-पैरों में अक्सर झनझनाहट रहती है? इसे मामूली स्किन एलर्जी समझकर बैठने की गलती आपको जीवन भर के लिए दिव्यांग (अपाहिज) बना सकती है। जिले में कुष्ठ रोग के खात्मे के लिए आज, 30 जनवरी से एक बड़ा 'स्पर्श' युद्ध शुरू होने जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग अब घर-घर जाकर उन छिपे हुए मरीजों की तलाश करेगा जो लोक-लाज या जानकारी के अभाव में अपनी बीमारी छिपा रहे हैं। दहशत नहीं, सावधानी की जरूरत: एमडीटी से जड़ से मिटेगा मर्ज मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. इम्तियाज अहमद ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि कुष्ठ रोग (हेंसन रोग) को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है। यह 'माइकोबैक्टीरियम लेप्री' नाम के बैक्टीरिया का हमला है। लेकिन अच्छी खबर यह है कि सरकार इसका पूरी तरह मुफ्त इलाज कर रही है। अगर वक्त पर पता चल जाए, तो शरीर का कोई भी अंग खराब होने से बच सकता है। इन 4 लक्षणों को 'रेड सिग्नल' मानें: त्वचा पर हल्के सफेद या तांबई रंग के धब्बे, जिनमें सुन्नपन हो (पिन चुभाने पर भी पता न चले)। नसों में तेज दर्द या सूजन महसूस होना। हाथ, पैर या पलकों की मांसपेशियों में अचानक कमजोरी आना। हाथ-पैरों में झनझनाहट और भारीपन रहना। 'छुआछूत' सिर्फ एक भ्रम, भेदभाव करने वालों पर प्रहार जिला कुष्ठ अधिकारी डॉ. प्रदीप सिंह यादव ने बताया कि इस साल की थीम है— "भेदभाव समाप्त कर गरिमा सुनिश्चित करें"। कुष्ठ रोग छुआछूत की बीमारी नहीं है। मरीजों को समाज से अलग-थलग करना न सिर्फ गलत है, बल्कि कानूनी रूप से भी अनुचित है। 13 फरवरी तक चलने वाले इस 'स्पर्श' अभियान में स्वास्थ्य विभाग की टीमें आपको जागरूक करेंगी। "डरें नहीं, जांच कराएं। आपका एक सही फैसला आपको दिव्यांगता की बैसाखियों से बचा सकता है। — डॉ. इम्तियाज अहमद, सीएमओ, ललितपुर