डीएलसी में सहारा मीडिया कर्मियों की सुनवाई, निर्णय मंगलवार तक संभव

गोरखपुर में राष्ट्रीय सहारा व सहारा समय के पत्रकारों की वेतन, ग्रेच्युटी व सेवा सुरक्षा को लेकर उप श्रमायुक्त के समक्ष सुनवाई, फैसला सुरक्षित।

डीएलसी में सहारा मीडिया कर्मियों की सुनवाई, निर्णय मंगलवार तक संभव
वेतन और सेवा सुरक्षा की मांग को लेकर डीएलसी कार्यालय पहुंचे सहारा पत्रकार

विभव पाठक /ब्यूरो चीफ 

निष्पक्ष जन अवलोकन 

गोरखपुर।

वर्षों से वेतन, ग्रेच्युटी और सेवा सुरक्षा जैसी बुनियादी मांगों के लिए संघर्ष कर रहे राष्ट्रीय सहारा एवं सहारा समय टीवी चैनल के पत्रकारों और कर्मचारियों के लिए सोमवार का दिन उम्मीद की एक नई किरण लेकर आया। श्रमायुक्त कार्यालय (डीएलसी) में उप श्रमायुक्त शक्ति सेन मौर्य के समक्ष इस बहुप्रतीक्षित प्रकरण की सुनवाई संपन्न हुई, जिसके बाद उन्होंने दोनों पक्षों की दलीलें सुनकर निर्णय सुरक्षित रख लिया। इस मामले में मंगलवार की शाम तक महत्वपूर्ण फैसला आने की संभावना जताई जा रही है।

हालांकि, इस सुनवाई के दौरान प्रबंधन और कर्मचारियों के बीच किसी भी स्तर पर प्रत्यक्ष वार्ता नहीं हुई। दोनों पक्षों की ओर से उनके अधिवक्ताओं ने अपना-अपना पक्ष मजबूती से रखा। सुनवाई के दौरान डीएलसी परिसर में 100 से अधिक पत्रकार और कर्मचारी मौजूद रहे। सभी ने शांतिपूर्ण और अनुशासित ढंग से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, जो वर्षों से बिखरे संघर्षों के बीच एकजुटता और आपसी solidarity का प्रतीक बनी।

इस मौके पर अलग-अलग इकाइयों और पदों पर कार्यरत पत्रकार एक मंच पर खड़े दिखाई दिए। उपस्थित लोगों का कहना था कि यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति या समूह की नहीं, बल्कि पूरे पत्रकार समुदाय के सम्मान, अधिकार और अस्तित्व से जुड़ी है। दूसरों की आवाज़ बनने वाले पत्रकार आज स्वयं अपने हक के लिए न्याय की गुहार लगा रहे हैं।

पत्रकारों और कर्मचारियों ने बताया कि बीते कई वर्षों तक उन्होंने अपनी पीड़ा सार्वजनिक नहीं की। पत्रकारिता की मर्यादा, स्वाभिमान और सामाजिक जिम्मेदारी के चलते वे चुपचाप आर्थिक तंगी झेलते रहे। परिवार, बच्चों की पढ़ाई और दैनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए उन्हें लगातार संघर्ष करना पड़ा, लेकिन फिर भी उन्होंने संस्था के प्रति अपनी निष्ठा बनाए रखी। हालात तब असहनीय हो गए, जब उनसे मौखिक रूप से इस्तीफा देने या सेवा समाप्ति की बात कहे जाने लगी।

कर्मचारियों का कहना है कि कई लोग 30 से 35 वर्षों से संस्था से जुड़े हैं। वर्ष 2013 से अब तक उन्हें न तो नियमित वेतन मिला और न ही पूर्ण भुगतान। कभी चार–पांच महीने का वेतन दिया गया, तो कभी आंशिक राशि देकर काम चलाया गया। इसके बावजूद उन्होंने संस्था का साथ नहीं छोड़ा। अब बिना किसी लिखित आदेश के सेवा समाप्ति की आशंका ने उनके भविष्य और बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सुनवाई के दौरान पत्रकारों और कर्मचारियों की ओर से अधिवक्ताओं ने बकाया वेतन, ग्रेच्युटी, भविष्य निधि (पीएफ) तथा अन्य वैधानिक देयों का मुद्दा मजबूती से रखा। वहीं, प्रबंधन पक्ष की ओर से भी अपनी दलीलें प्रस्तुत की गईं। उप श्रमायुक्त शक्ति सेन मौर्य ने दोनों पक्षों को ध्यानपूर्वक सुनते हुए स्पष्ट किया कि मामले का निस्तारण कानून के दायरे में रहकर किया जाएगा।

सुनवाई के बाद पत्रकारों और कर्मचारियों के बीच यह भरोसा नजर आया कि वर्षों से चली आ रही उनकी पीड़ा का अब कोई ठोस समाधान निकल सकता है। सभी की निगाहें मंगलवार शाम तक आने वाले फैसले पर टिकी हैं। उन्हें उम्मीद है कि यह निर्णय न केवल उन्हें न्याय दिलाएगा, बल्कि उनके सम्मान, आजीविका और भविष्य की सुरक्षा का मार्ग भी प्रशस्त करेगा।