कर्तव्य पथ पर गोरखपुर की बेटी का कथक, गणतंत्र दिवस पर रचेगा इतिहास
गोरखपुर की कथक नृत्यांगना श्रेयांशी श्रीवास्तव का गणतंत्र दिवस पर कर्तव्य पथ के लिए चयन। संगीत नाटक अकादमी के आमंत्रण पर राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुति।
विभव पाठक /ब्यूरो चीफ
निष्पक्ष जन अवलोकन
गोरखपुर। गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर जब देश की राजधानी दिल्ली स्थित कर्तव्य पथ पर भारत की सांस्कृतिक विरासत का भव्य प्रदर्शन होगा, तब उसी ऐतिहासिक मंच पर गोरखपुर की बेटी श्रेयांशी श्रीवास्तव का कथक संपूर्ण जनपद के गौरव और पहचान का प्रतीक बनेगा। श्रेयांशी का चयन राष्ट्रीय सांस्कृतिक प्रस्तुति के लिए संगीत नाटक अकादमी द्वारा किया गया है, जो किसी भी शास्त्रीय कलाकार के लिए सर्वोच्च सम्मान माना जाता है।
गोरखपुर निवासी एवं प्रवीर आर्य की सुपुत्री श्रेयांशी श्रीवास्तव इस अवसर पर भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व करते हुए कथक नृत्य की प्रस्तुति देंगी। कर्तव्य पथ जैसे ऐतिहासिक और वैश्विक मंच पर प्रस्तुति देना केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि गोरखपुर की सांस्कृतिक चेतना और शास्त्रीय परंपरा की राष्ट्रीय पहचान भी है। यह क्षण जनपद के सांस्कृतिक इतिहास में स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज होगा।
श्रेयांशी की कथक साधना में शास्त्रीय अनुशासन के साथ भाव, लय और ताल का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है। उनके पद-संचालन में जहां घुंघरुओं की सधी हुई थाप होती है, वहीं भावाभिनय में भारतीय संस्कृति की आत्मा झलकती है। गणतंत्र दिवस की प्रस्तुति में उनका कथक केवल नृत्य नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विविधता, राष्ट्रीय एकता और परंपरा का जीवंत मंचन होगा।
इस राष्ट्रीय मंच तक पहुँचने से पूर्व श्रेयांशी श्रीवास्तव ने पर्यटन विभाग के आमंत्रण पर 27 दिसंबर से 31 दिसंबर तक अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में कथक की प्रभावशाली प्रस्तुतियाँ दीं। इन प्रस्तुतियों को दर्शकों और आयोजकों से अत्यंत सराहना मिली। समुद्र की लहरों के बीच गूंजती उनकी घुंघरुओं की ध्वनि ने न केवल कथक की गरिमा को दर्शाया, बल्कि गोरखपुर की सांस्कृतिक सुगंध को देश के सुदूर द्वीपों तक पहुँचाया।
श्रेयांशी की यह उपलब्धि गोरखपुर के लिए इसलिए भी विशेष है, क्योंकि यह दर्शाती है कि निरंतर साधना, गुरु-शिष्य परंपरा में विश्वास और समर्पण से स्थानीय प्रतिभाएं भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी पहचान बना सकती हैं। यह सफलता जनपद की बेटियों और युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनकर सामने आई है।
इस गौरवपूर्ण चयन पर गोरखपुर का सांस्कृतिक और सामाजिक जगत हर्ष से अभिभूत है। गुरुजन, कला प्रेमी, शिक्षाविद, सामाजिक संगठन एवं नगरवासी एक स्वर में श्रेयांशी श्रीवास्तव को शुभकामनाएं दे रहे हैं। सभी को विश्वास है कि कर्तव्य पथ पर उनका कथक न केवल गोरखपुर, बल्कि संपूर्ण उत्तर प्रदेश की कला परंपरा को नई ऊंचाई प्रदान करेगा।
गणतंत्र दिवस के दिन जब देश की नजरें कर्तव्य पथ पर होंगी, तब गोरखपुर की बेटी का यह कथक नृत्य राष्ट्र की सांस्कृतिक चेतना का गौरवशाली स्वर बनेगा।