कलम थमी तो घरों में सन्नाटा: वेतन न मिलने से टूटे पत्रकार, डीएम से लगाई न्याय की गुहार
गोरखपुर में राष्ट्रीय सहारा प्रेस और समय के पत्रकार व कर्मचारी महीनों से वेतन न मिलने से संकट में हैं। डीएम से मिलकर बकाया भुगतान और न्याय की मांग की।
विभव पाठक /ब्यूरो चीफ
निष्पक्ष जन अवलोकन
गोरखपुर। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को मजबूत करने वाले पत्रकार आज खुद गहरे संकट में हैं। राष्ट्रीय सहारा प्रेस और राष्ट्रीय सहारा समय से जुड़े पत्रकारों व कर्मचारियों की आर्थिक और मानसिक स्थिति दिन-प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है। महीनों से वेतन न मिलने, प्रेस का काम बंद होने और जबरन त्यागपत्र देने के निर्देशों के बाद हालात इतने खराब हो गए हैं कि कई परिवारों के सामने रोज़मर्रा की जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल हो गया है।
सोमवार को पीड़ित पत्रकारों और कर्मचारियों का एक प्रतिनिधिमंडल जिलाधिकारी दीपक मीणा से मिला और अपनी पीड़ा भावुक शब्दों में रखी। उन्होंने बताया कि श्रमायुक्त द्वारा आरसी (रिकवरी सर्टिफिकेट) जारी किए जाने के बावजूद अब तक बकाया वेतन का भुगतान नहीं हुआ है।
कर्मचारियों के अनुसार, 8 जनवरी 2026 को सहारा प्रबंधन ने अचानक प्रेस का मुद्रण कार्य बंद करा दिया और कर्मचारियों को त्यागपत्र देने के लिए कहा। इसके बाद से वे बेरोजगार जैसी स्थिति में हैं। न तो भविष्य को लेकर कोई स्पष्ट योजना दी गई और न ही आर्थिक सुरक्षा।
पत्रकारों ने बताया कि उन्होंने अपनी समस्याओं को लेकर डीएलसी, श्रम विभाग, मुख्यमंत्री कार्यालय और जिला प्रशासन तक गुहार लगाई, लेकिन हर जगह से केवल आश्वासन ही मिला। इस बीच कई परिवारों पर आर्थिक संकट गहराता चला गया।
मुलाकात के दौरान कई पत्रकार भावुक हो गए। कुछ ने बताया कि बच्चों की स्कूल फीस उधार लेकर भरी गई, तो कुछ ने घर चलाने के लिए जेवर तक गिरवी रख दिए। उनका कहना था कि वर्षों तक संस्थान के लिए दिन-रात मेहनत करने के बाद आज उन्हें असुरक्षा और उपेक्षा का सामना करना पड़ रहा है।
राष्ट्रीय सहारा परिसर में पत्रकारों और कर्मचारियों ने शांतिपूर्ण धरना भी दिया। प्रबंधन समिति से वार्ता हुई, लेकिन कोई ठोस परिणाम नहीं निकला। कर्मचारियों का आरोप है कि प्रबंधन केवल समय टाल रहा है, जबकि उनके घरों में चूल्हे बुझने की नौबत आ चुकी है।
पत्रकारों ने सवाल उठाया कि जब मीडिया संस्थान अपने ही कर्मचारियों के साथ न्याय नहीं कर पा रहे, तो समाज को न्याय का भरोसा कैसे दिलाया जाएगा। उनका कहना है कि यह संघर्ष अब सिर्फ वेतन का नहीं, बल्कि सम्मान, सुरक्षा और परिवारों के भविष्य का है।
जिलाधिकारी दीपक मीणा ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुना और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। हालांकि कर्मचारियों का कहना है कि अब उन्हें आश्वासन नहीं, बल्कि तत्काल वेतन भुगतान और भविष्य की सुरक्षा चाहिए।
पीड़ित पत्रकारों ने स्पष्ट कहा — “जब तक न्याय नहीं मिलेगा, हमारा संघर्ष जारी रहेगा, क्योंकि सवाल अब सिर्फ नौकरी का नहीं, बल्कि जिंदगी बचाने का है।”