जल सहेलियों के द्वारा नदी बचाने के लिए किये जा रहे प्रयासों का ऋणी रहेगा समाज : प्रहलाद सिंह पटेल
उरई(जालौन)जहाँ पर्वतों नदियों का संगम होता है वहीं जीवन की संभावनाएँ जन्म लेती हैं नदियों का अपना स्वभाव और चरित्र होता है इसलिए हमें नदियों को उनके प्राकृतिक स्वभाव के अनुसार बहने देना चाहिए यह बात मध्य प्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने पचनद संगम पर जल सहेलियों की अविरल निर्मल यात्रा के शुभारंभ अवसर पर कही श्री पटेल ने जल संरक्षण के लिए जीवन समर्पित करने वाली जल सहेलियों की सराहना करते हुए कहा कि समाज सदैव उनका ऋणी रहेगा सरकार लगातार नदियों की अविरलता और निर्मलता के साथ काम कर रही है अब समाज को उससे जुड़ने की आवश्यकता है जब नीर-नारी-नदी एक होगा तभी हम प्रकृति के संतुलन बनाये रख पाएंगे भारतीय संस्कृति के महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि सृष्टि का संतुलित विकास तभी संभव है जब हम प्रकृति को संरक्षित रखेंगे शुभारंभ कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जल पुरुष डॉ. राजेंद्र सिंह ने कहा कि नदियों की जिम्मेदारी केवल सरकार या कॉरपोरेट क्षेत्र की नहीं बल्कि पूरे समाज की है उन्होंने कहा कि आज यह जिम्मेदारी जल सहेलियों ने अपने कंधों पर उठाई है तभी वे पचनद से दिल्ली तक पैदल यात्रा कर समाज को यह संदेश देने जा रही हैं कि नदियाँ हमारे जीवन के लिए कितनी आवश्यक हैं सिंह ने कहा कि भारतीय संस्कृति में नल नदी और नारी का सम्मान किया जाता था लेकिन आज गाँवों और शहरों का गंदा पानी सीधे नदियों में छोड़ा जा रहा है जिससे नदियाँ लगातार प्रदूषित हो रही हैं उन्होंने समाज और विद्यार्थियों से अपील की कि नदियों को स्वच्छ और जीवंत बनाए रखने के लिए ठोस और सशक्त कदम उठाए जाएँ उन्होंने यह भी कहा कि आज नदियों को खतरा केवल शहरी प्रदूषण से ही नहीं बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती रासायनिक खेती और प्रदूषण से भी है जिसके प्रति समाज में जागरूकता अत्यंत आवश्यक है, ताकि जीवन का चक्र निरंतर चलता रहे जालौन के जिलाधिकारी राजेश पांडेय ने जल सहेलियों के इस संकल्प को अत्यंत प्रेरणादायी बताते हुए कहा कि पचनद से दिल्ली तक यमुना नदी के लिए की जा रही यह पैदल जल यात्रा जनचेतना को नई दिशा देगी उन्होंने सुझाव दिया कि इस यात्रा के उद्देश्य में शैक्षिक संस्थानों की सक्रिय भागीदारी भी शामिल की जानी चाहिए, ताकि वे नदियों को बचाने में अपनी अग्रणी भूमिका निभा सकें परमार्थ संस्थान के अध्यक्ष राणा प्रताप सिंह ने कहां पानी के साथ-साथ पर्यावरण जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। जल के बिना न तो स्वस्थ समाज की कल्पना की जा सकती है और न ही सुरक्षित भविष्य की। इसी दिशा में जल सहेलियाँ निरंतर और निष्ठा के साथ जल संरक्षण के लिए कार्य कर रही हैं जल सहेली संगठन के संस्थापक संजय सिंह ने कहां कि यह जल सहेलियों की यात्रा मात्र एक पदयात्रा नहीं बल्कि जन–जन को जागृत करने वाली संचेतना की यात्रा है। यह यात्रा यमुना को पुनः अविरल और निर्मल बनाने के दृढ़ संकल्प का प्रतीक है इस अभियान में हर जिले से जुड़ी जल सहेलियाँ यह संदेश दे रही हैं कि नदी केवल जलधारा नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, आस्था और आत्मा है यमुना यात्रा का उद्देश्य समाज को नदी संरक्षण के प्रति जागरूक करना, यमुना में हो रहे प्रदूषण को रोकने हेतु जनभागीदारी सुनिश्चित करना, स्थानीय समुदायों को नदी के साथ पुनः जोड़ना तथा भावी पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और जीवंत यमुना का निर्माण करना है यह यात्रा यह भी स्पष्ट करती है कि जब समाज एकजुट होकर संकल्प लेता है, तो नदियों का पुनर्जीवन संभव है। साध्वी सरिता देवी इसे स्मिथ के बहुत प्रेरणादाई कार्य बताएं जल सहेली संगठन की अध्यक्ष पुष्पा ने कहां कि हम जल सहेलियाँ आज देश में जल संरक्षण की सबसे सशक्त जन आंदोलनकारी शक्ति बनकर उभरी हैं गाँव-गाँव घर-घर जाकर जल बचाने जल स्रोतों के संरक्षण और स्वच्छता के प्रति जागरूकता फैलाने का जो कार्य जल सहेलियाँ कर रही हैं हम यमुना यात्रा के माध्यम इसी जनचेतना को और व्यापक रूप फैलाना चाहते है इस यात्रा का उद्देश्य यमुना को अविरल और निर्मल बनाने के साथ-साथ समाज को नदी के प्रति उसके दायित्व का बोध कराना है इस अवसर पर कामना भदोरिया जिला पंचायत अध्यक्ष भिंड विपुल शिव सागर बेसिक शिक्षा अधिकारी झाँसी रवि शंकर तिवारी यमुना मंत्री प्रतिनिधि अरविंद सिंह चौहानअजीत सिंह सेंगर ब्लॉक प्रमुख रामपुरा अनुपमा लोदी सदस्य राज्य महिला आयोग उत्तर प्रदेश कामना भदौरिया जिला पंचायत अध्यक्ष भिंड मूलचंद निरंजन विधायक माधौगढ़ भाजपा के वरिष्ठ नेता शीतल सिंह सेंगर करन सिंह प्रशासनकमल लिखधारी सहित 2000 से अधिक जल सहेली उपस्थित रही