देश के रक्षकों के सम्मान में प्रशासन सख्त-सैनिकों की फाइलों पर अब नहीं जमेगी धूल
एडीएम नमामि गंगे ने दी चेतावनी कहा- पूर्व सैनिकों की समस्याओं में देरी हुई तो खैर नहीं
निष्पक्ष जन अवलोकन। अरविन्द कुमार पटेल। ललितपुर। सरहद पर देश की रक्षा करने वाले जांबाजों के सम्मान और उनकी सहूलियत के लिए जिला प्रशासन अब 'एक्शन मोड' में है। गुरुवार को कलेक्ट्रेट में हुई 'सैनिक बंधु' बैठक में अपर जिलाधिकारी (नमामि गंगे) ने साफ कर दिया कि पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों की समस्याओं के निस्तारण में कोई भी बहाना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। एडीएम ने कहा - जो सरहद पर लड़े, वो दफ्तरों के चक्कर क्यों काटें? बैठक के दौरान एडीएम ने लंबित फाइलों को देखकर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने संबंधित विभाग के अधिकारियों को कड़ा रुख अपनाते हुए आदेश दिया: तुरंत समाधान: लंबित मामलों का निस्तारण 'सुपरफास्ट' गति से हो। कार्यालय आने वाले पूर्व सैनिकों और वीर नारियों को पूरा सम्मान मिले। अगली बैठक तक अगर समाधान नहीं हुआ, तो जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब मांगा जाएगा। कर्नल अहलूवालिया ने गिनाए हक और अधिकार जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कर्नल आशीष अहलूवालिया ने बैठक में मौजूद पूर्व सैनिकों और वीर नारियों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया। उन्होंने केंद्र व राज्य सरकार की उन योजनाओं की जानकारी दी, जिनसे आर्थिक और सामाजिक मदद मिल सकती है। एडीएम ने कहा- "सैनिकों की समस्याओं का समाधान हमारी ड्यूटी नहीं, हमारा फर्ज है।" सुनवाई: वीर नारियों और आश्रितों की पेंशन व जमीन संबंधी शिकायतों को मौके पर नोट किया गया। भरोसा: प्रशासन ने आश्वासन दिया कि प्राथमिकता के आधार पर हर शिकायत का समाधान होगा। "हम चैन की नींद सोते हैं क्योंकि ये सीमा पर जागते हैं। इनकी आंखों में आंसू या दफ्तरों के चक्कर लगाना व्यवस्था के लिए शर्म की बात है। प्राथमिकता पर समाधान होगा। — अपर जिलाधिकारी (नमामि गंगे)