साल में एक ही दिन खुलने वाले बसंती कमरे के दर्शन को उमड़ा भक्तों का सैलाब

साल में एक ही दिन खुलने वाले बसंती कमरे के दर्शन को उमड़ा भक्तों का सैलाब

निष्पक्ष जन अवलोकन

राहुल शर्मा

थुरा। ब्रज क्षेत्र में बसंतोत्सव का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। बसंत पंचमी के साथ ही ब्रज के मंदिरों में उत्सवों की श्रृंखला आरंभ हो जाती है। इसी क्रम में वृंदावन स्थित शाहजी मंदिर (टेढ़े खंभे वाला मंदिर) में साल में केवल एक दिन खुलने वाले बसंती कमरे के दर्शन के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह से ही मंदिर परिसर में राधा-कृष्ण के जयकारों के बीच श्रद्धालु दर्शन के लिए कतारों में खड़े नजर आए। बसंती कमरे की विशेषता यह है कि यह केवल बसंत पंचमी के दिन ही भक्तों के लिए खोला जाता है। इस दिन भगवान श्री राधारमण ठाकुर पीले वस्त्रों में सुसज्जित होकर दिव्य सिंहासन पर विराजमान होते हैं। विदेशी झालरों, विशेष लाइटिंग और मनमोहक फूलों की सजावट से सजे इस कक्ष में प्रवेश करते ही भक्त भाव-विभोर हो उठते हैं। राधा-कृष्ण की अलौकिक छवि देखकर श्रद्धालु भक्ति में डूब जाते हैं और घंटों तक दर्शन करते हैं। मंदिर के सेवायत गोस्वामी प्रशांत शाह ने बताया कि इस प्राचीन मंदिर को टेढ़े खंभे के मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। मंदिर की दीवारों पर 14 विभिन्न कलाकृतियां बनी हैं, जबकि बरामदे में पाषाण कालीन चित्र इसकी ऐतिहासिकता को दर्शाते हैं। बसंती कमरे का निर्माण सन 1863 में लखनऊ के नवाब फुंदनलाल शाह और कुंदनलाल शाह द्वारा कराया गया था। यह कक्ष मंदिर के ऋतुराज भवन में स्थित है और अपनी अनूठी सजावट के लिए प्रसिद्ध है। उन्होंने बताया कि बसंत ऋतु का अहसास कराने के लिए कमरे में मौसम के अनुसार फूलों की विशेष सजावट की जाती है। आकर्षक झाड़-फानूस, आधुनिक लाइटिंग और कमरे के बीचों-बीच इटली से लाए गए पत्थरों से बने फव्वारे को नहर का रूप दिया गया है, जो श्रद्धालुओं को विशेष आकर्षित करता है। मान्यता है कि जो भक्त साल में एक बार होने वाले इन दुर्लभ दर्शनों को करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और अंततः उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने बताया कि वे हर वर्ष इस दिन का बेसब्री से इंतजार करते हैं। दर्शन के बाद भक्तजन भजन-कीर्तन, नृत्य और प्रसाद वितरण में भी शामिल हुए। पूरे वृंदावन में बसंत पंचमी के अवसर पर भक्ति, उल्लास और आध्यात्मिक आनंद का वातावरण देखने को मिला।