साइबर थाना पुलिस टीम ने डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाकर पीड़ित से ठगी गयी धनराशि 11,50,000/- रूपये वादी के खाते में करवाए वापस ।
निष्पक्ष जन अवलोकन। । शिवसंपत करवरिया चित्रकूट।वर्तमान में बढ़ते साइबर अपराध को रोकने व आमजनमानस को इससे राहत दिलाने के उद्देश्य के तहत चलाये जा रहे अभियान के क्रम में पुलिस अधीक्षक चित्रकूट अरुण कुमार सिंह के कुशल निर्देशन में अपर पुलिस अधीक्षक चित्रकूट सत्यपाल सिंह व क्षेत्राधिकारी मऊ/साइबर फहद अली के पर्यवेक्षण में प्रभारी निरीक्षक साइबर थाना व उनकी टीम द्वारा पुलिस/सीबीआई का डर दिखाकर पीड़ित से जांच के नाम पर धोखाधड़ी करने के मामले में 11,50,000 रूपये वादी के खाते में वापस करवायें गये। उल्लेखनीय है कि दिनांक 02.12.2025 को वादी रामशरण वर्मा पुत्र स्व0 चुन्नीलाल निवासी शकुन्तलम भवन भैरोपागा थाना कोतवाली कर्वी जनपद चित्रकूट द्वारा साइबर थाना चित्रकूट पर प्रार्थना पत्र दिया कि दिनांक 20/11/2025 को उनके मोबाइल पर अज्ञात मोबाइल नंबर से मिनिस्ट्री ऑफ हयूमन रिसोर्सेज का व्यक्ति बताकर फोन किया और बताया कि आपके सिम से विभिन्न लोगो को इल्लीगल और ह्रासमेंट सम्बन्धी मैसेज किये जा रहे है जिसके बाद दिल्ली पुलिस व सीबीआई के द्वारा जांच का डर दिखाते हुए जांच/Bank Verify के नाम पर उनके साथ धोखाधड़ी कर ली है जिसके सम्बन्ध में दिनांक 02.12.2025 को साइबर थाना चित्रकूट में मु0अ0स0 17/2025 धारा 318(4),319(2)बीएनएस 66D I.T.ACT पंजीकृत किया गया । प्रकरण के गंभीरता के दृष्टिगत पुलिस अधीक्षक चित्रकूट के निर्देशन में क्षेत्राधिकारी मऊ/साइबर फहद अली के नेतृत्व में साइबर थाना टीम द्वारा त्वरित कार्यवाही करते हुए सम्बन्धित बैंक से समन्वय स्थापित करते हुए कुल धनराशि-11,50,432/- रूपये संदिग्ध खाते में होल्ड कराए गए थे। तत्पश्चात् माननीय न्यायालय से कार्ट ऑर्डर के आधार पर वादी के खाते में धोखाधड़ी की धनराशि-11,50,000 रूपये वापस करायी गयी । जिस पर आज वादी द्वारा लिखित रूप से प्रशंसा पत्र देकर सहयोग व कार्यवाही के लिए थाना साइबर थाना टीम को धन्यवाद दिया तथा भूरि –भूरि प्रशंसा की। प्रकरण में की गयी त्वरित कार्यवाही से आमजन मानस में चित्रकूट पुलिस के प्रति विश्वास में बढ़ोत्तरी हुई । वापस करायी गयी कुल राशि--- 11,50,000 /- रूपये पुलिस टीम के साइबर थाना पुलिस टीम - 1.प्रभारी निरीक्षक साइबर थाना रीता सिंह 2. निरीक्षक नरेश कुमार प्रजापति । 3. क0ऑ0 ग्रेड बी(एएसआई) श्याम लाल गुप्ता । 4. का0 शिवम द्विवेदी । 5. का0 राम विलास । क्या होता है DIGITAL ARREST….. इस फ्राड में आपको एक कम्प्यूटर जनरेटेड वायस काल आती है या फिर नार्मल काल आती है और बताया जाता है जो आपका पार्सल जा रहा था कैंसिल हो गया है, अधिक जानकारी के लिये के लिये हमारे कस्टमर केयर अधिकारी से बात किजिए यहा पर जैसे ही काल कनेक्ट की जाती है उनके द्वारा बताया है जाता है कि आपके सामान में गैरकानूनी सामान था, या फिर कोई सामान ले के जा रहा था जिसमें आपके नाम का आधार और सिम कार्ड लगा है अगर आपको लगता है कि आपके आधार या सिम कार्ड का दुरूपयोग हुआ है तो आपकी तुरन्त एफ.आई.आर कराइये नही तो आपको जेल भेज दिया जायेगा फिर वहा से अपना एविडेंस देते रहीयेगा तो पीड़ित को लगता है कि यही पर हम अपनी एफ,आई,आर दर्ज करा दें , तो सामने वाला कस्टमर केयर अधिकारी बताता है कि ये हाई स्क्योरिटी का मामला है सारी बाते गोपनीय रखियेगा किसी से अभी शेयर नही किजिएगा और आपको विडियो कालिंग एप Skype डाउनलोड करा दिया जाता है, सामने फर्जी पुलिस वाले वर्दी में बैठे होते है और वो आपका एफ.आई.आर लिखना चालू करते है जैसे अपनी घटना बताते है कि आधार या सिम कार्ड गलत यूज हुआ है और अपना नाम पता बताते है तभी फर्जी पुलिस के तरफ से बैकग्राउंड से आवाज आने लगती है कि इसका नाम मनी लांड्रिंग में स्मलिंग भी नाम आया है और फर्जी पुलिस वाला कहता है कि आपको लाइन पर बने रहना होगा क्योकि आपका नाम और भी हमारे केस आया है जब तक जांच पुरी नही होती आप कैमरे के सामने बने रहेंगे । मनी लॉन्ड्रिंग वरिफाई करने के लिये आप को अपने खाते की डिटेल और बैंक बैलेंस दिखाना होगा अब जैसे ही पीड़ित दिखाता है कि खाते में इतना बैंलेंस है तो कहते है ये पैसे आपको हमारे सुरक्षित आरबीआई के खाते में ट्रांसफर करना होगा पैसे वरिफाई कर ये पैसे आपको रिटर्न कर दिये जायेगें । पीड़ित डर कर पैसे भेज देता है जो आरबीआई का ना होकर साइबर अपराधी का खाता होता है फिर कहा जाता है कि हमारे आरबीआई के डिटेल में शो हो रहा है कि आपका और भी खाता है , ट्रेडिंग अंकाउंट भी है जल्दी से जल्दी ये पैसे आप आरबीआई के वैलेट में भेजिये और फिर ऐसे ही बातो से डराकर लाखो करोड़ो रूपये ले लेते है और पुरे पैसे जाने के बाद एहसास होता है कि आपके साथ साइबर ठगी हुयी है । सावधानियां व बचाव........... ?अगर कोई आपको पुलिस या सीबीआइ अधिकारी बनकर डिजिटल तौर पर गिरफ्तार करने की धमकी देता है, तो सबसे पहले आपको अपने परिवार के सदस्यों या दोस्तों को सूचित करना चाहिए। तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन में जाकर इसकी शिकायत करानी चाहिए, इस बात से नहीं डरना चाहिए कि पुलिस आपके खिलाफ कोई एक्शन लेगी। ?सामान्य तौर पर पुलिस या कोई भी जांच एजेंसी आपको कॉल करके धमकी नहीं देगी इसके लिए कानूनी प्रक्रिया होती है और उसी के तहत उसे पूरा किया जाता है जिसमें आपका लोकल पुलिस स्टेशन के अधिकारी शामिल होते है और आपके घर पर पुलिस भौतिक रूप से जरूर आती है, अगर आपको कोई डराने या धमकाने का ऐसा कॉल आता है तो तुरंत आप उसकी सूचना पुलिस को दे दें, अगर कोई आपको किसी खास एजेंसी जैसे सीबीआई या इनकम टैक्स डिपार्टमेंट/ ट्राई का अधिकारी बात कर बात कर रहा है तो आप उस एजेंसी के नंबर पर कॉल करके इस बात की जानकारी दे सकते हैं और उनसे मदद मांग सकते हैं। सबसे जरूरी बात जब कोई आपको कॉल पर आपसे पैसों की मांग करे तो आपको पैसे ट्रांसफर नहीं करने हैं, अपनी निजी जानकारी अथवा बैंक संबन्धित कोई भी जानकारी बिल्कुल भी शेयर ना करें और और न ही आपको बैंक अकाउंट या कार्ड डिटेल शेयर करनी है। खुद को स्कैम और फ्रॉड जैसी घटनाओं से अपडेट रखें ताकि अगर कोई आपके साथ ऐसा कुछ भी करने का ट्राई करे तो आप पहले से ही अलर्ट हो और कोई आपको नुकसान न पहुंच पाए। अगर इसके बावजूद आपके साथ साइबर फ्रॉड हो जाता है तो आप 1930 नेशनल साइबरक्राइम हेल्पलाइन पर कॉल करके तुरंत इस बात की शिकायत दर्ज कराएं या https://cybercrime.gov.in/ अथवा https://sancharsaathi.gov.in/ पर रिपोर्ट करें , साथ ही सोशल मीडिया साइट एक्स पर @cyberdost के माध्यम से भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं । सतर्क रहे , सावधान रहें ।