पचपेडवा ब्लॉक में मनरेगा का बड़ा घोटाला, कागज़ों में मजदूरी—जमीन पर सन्नाटा
निष्पक्ष जन अवलोकन। संवाददाता पचपेडवा विकासखंड में( बलरामपुर )महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत बड़े पैमाने पर कथित फर्जीवाड़े का सनसनीखेज मामला सामने आया है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी और मीडिया की स्थलीय पड़ताल में चौंकाने वाली तस्वीर उभरकर सामने आई है, जिसने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मीडिया टीम की जांच में ग्राम पंचायत गौरी भारी में 4 मास्टर रोल पर 40 मजदूरों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज पाई गई, जबकि कार्यस्थल पर पहुंचने पर एक भी मजदूर मौजूद नहीं मिला। इसी तरह ग्राम पंचायत मनकापुर में 3 मास्टर रोल और 36 मजदूरों की ऑनलाइन अटेंडेंस दर्शाई गई, लेकिन मौके पर सन्नाटा पसरा रहा, कार्य पूरी तरह ठप मिला। तीसरा मामला ग्राम पंचायत लालपुर भवनडीह का है, जहां 3 मास्टर रोल पर 36 मजदूरों की ऑनलाइन हाजिरी दर्ज की गई, लेकिन कार्यस्थल पर न मजदूर मिले और न ही कोई निर्माण कार्य चलता दिखा। कागजों में विकास और ज़मीनी हकीकत के बीच भारी अंतर साफ दिखाई दिया। सबसे चिंताजनक बात यह रही कि इन ग्राम पंचायतों में बने सामुदायिक शौचालय बंद पाए गए और पंचायत भवनों पर ताले लटके मिले। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रधानों और संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत से मनरेगा की राशि का खुलेआम दुरुपयोग किया जा रहा है। संवाददाता द्वारा जब इस पूरे मामले पर दूरभाष के माध्यम से जिम्मेदार अधिकारी मोहित दुबे से संपर्क किया गया, तो संतोषजनक जवाब नहीं मिला। वहीं, खंड विकास अधिकारी (BDO) से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन फोन काट दिया गया, जिससे संदेह और गहरा गया है। मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना में इस तरह की कथित धांधली से गरीब मजदूरों के हक पर सीधा डाका डाला जा रहा है। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस गंभीर मामले में कब तक जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करता है, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।