बाग़ बुलबुल, राग़ कोयल चाहिए,चाह हर दिल, राह मंज़िल चाहिए। बाग़बां कोई रखो, रख लो जनाब, शाख़ पर महफूज़,हर ग़ुल चाहिए-अभाषित नरेंद्र
निष्पक्ष जन अवलोकन
बिल्सी(बदायूँ) । नगर के तहसील रोड स्थित सिटी कंपलेक्स पर विश्व पत्रकारिता स्वतंत्रता दिवस एवं हिंदी साहित्य सेवा समिति उत्तर प्रदेश के बैनर तले एवं द जर्नलिस्ट एसोसिएशन बदायूँ की मासिक बैठक का आयोजन संयुक्त रूप से किया गया । सर्वप्रथम कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती के चित्र के समस्त पुष्प समर्पित कर वृद्ध कवि सोमेंद्र सोम उर्फ दादा जी ने किया इसके बाद कार्यक्रम में हिस्सा लेने वाले सभी पत्रकारों ने अपने-अपने विचार रखते हुए कहा कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ कहे जाने वाले पत्रकार समाज को आज सुरक्षा की अति आवश्यकता है जिसके ऊपर कानून बनना परम आवश्यक है । इसके बाद यहां विधिवत काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें सर्वप्रथम संस्था के अध्यक्ष कवि विष्णु असावा ने सुनाया की जर्जर काया बूढ़ी माँ की, घर में टूटी खटिया पर। चार-चार बेटे हैं फिर भी , उसे भरोसा लठिया पर।। कवि ओजस्वी जौहरी ने सुनाया की अब दया कर दो दिवाकर हम सभी बे हाल है जीव सब अकुला रहैं है शुष्क पोखर ताल हैं। तप रही है ये ज़मीं भी आसमा है तप रहा तमतमाना छोड़ दो हम सब तुम्हारे लाल हैं हर गोविन्द पाठक दीन बिसौली ने सुनाया कि हे महेश्वर वरप्रद वन्दना स्वीकार कर । हे कवीश मम लेखनी में नव आविष्कार भर ।सिद्धिविनायक गुणिन मम कोटिशः तुझको नमन, मनोमय निज वतन के प्रमोद से होवे शमन, हे सुरेश्वर निज तूलिका को अंगीकार कर । हे गजानन मेरे मसीपथ तुझको समर्पित, मम भाव और भावना पुष्प संग तुझको अर्पित, हे अभित निज गति का मम मति में चमत्कार भर । अभाषित नरेंद्र बिसौली ने सुनाया कि बाग़ बुलबुल, राग़ कोयल चाहिए। चाह हर दिल, राह मंज़िल चाहिए। बाग़बां कोई रखो, रख लो जनाब, शाख़ पर महफूज़,हर ग़ुल चाहिए। चमन की हिफाज़त,जो कांटों से होती। तो गुल साख से, टूट कर न बिखरता। शफ़ा जिंदगी की, जो हाथों में होती, जहां में कोई शक्श, हरगिज न मरता। कवि देव ठाकुर ने भी अपना काव्य पाठ किया ।। इसके बाद कार्यक्रम का समापन किया गया ।डॉ नीरज अग्निहोत्री ,ट्री मैन प्रशान्त जैन,ललित मोहन ,सूरज पाल,विवेक चौहान ,मनोज माहेश्वरी ,सौरभ चौहान आदि लोग मौजूद रहे









