गोरखपुर के सरस्वती शिशु मंदिर में हर्षोल्लास से मनाई गई महात्मा बुद्ध जयंती

गोरखपुर के सरस्वती शिशु मंदिर में महात्मा बुद्ध जयंती श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। कार्यक्रम में बुद्ध के जीवन और शिक्षाओं पर प्रकाश डाला गया

गोरखपुर के सरस्वती शिशु मंदिर में हर्षोल्लास से मनाई गई महात्मा बुद्ध जयंती
सरस्वती शिशु मंदिर, राप्ती नगर, गोरखपुर में महात्मा बुद्ध जयंती के अवसर पर आयोजित वंदना सभा में दीप प्रज्वलित करते विद्यालय के आचार्य।

विभव पाठक /ब्यूरो चीफ 

निष्पक्ष जन अवलोकन 

गोरखपुर। स्थानीय विद्यालय सरस्वती शिशु मंदिर 10+2, रेल विहार, राप्ती नगर, गोरखपुर में बुधवार को महात्मा बुद्ध जयंती का आयोजन अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं पुष्पार्चन के साथ हुई, जिसके बाद सरस्वती वंदना प्रस्तुत की गई।

वंदना के उपरांत विद्यालय के जयंती प्रमुख आचार्य प्रेम सागर ने महात्मा बुद्ध के जीवन और उनके आदर्शों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि महात्मा बुद्ध का संपूर्ण जीवन मानवता की सेवा और कल्याण के लिए समर्पित रहा। राजकुमार सिद्धार्थ ने सांसारिक सुख-सुविधाओं का त्याग कर वैराग्य का मार्ग अपनाया और छह वर्षों की कठोर तपस्या के बाद बोधगया में ज्ञान प्राप्त कर ‘बुद्ध’ कहलाए।

उन्होंने यह भी बताया कि महात्मा बुद्ध का जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण—तीनों ही वैशाख पूर्णिमा के दिन हुए, जो इस दिन को विशेष बनाता है। उनकी शिक्षाएं प्रेम, करुणा और अहिंसा का संदेश देती हैं, जो आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं।

कार्यक्रम के समापन सत्र में विद्यालय के प्रधानाचार्य विनोद सिंह राठौर ने महात्मा बुद्ध के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका जन्म 563 ईसा पूर्व लुम्बिनी (नेपाल) में हुआ था। उनके पिता शुद्धोधन कपिलवस्तु के राजा थे। 29 वर्ष की आयु में उन्होंने सांसारिक दुखों को देखकर गृह त्याग किया और सत्य की खोज में निकल पड़े। बोधगया में बोधि वृक्ष के नीचे उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ।

प्रधानाचार्य ने बुद्ध के प्रसिद्ध संदेश “अप्प दीपो भव” का उल्लेख करते हुए कहा कि इसका अर्थ है—“स्वयं अपना प्रकाश बनो।” यह संदेश आत्मनिर्भरता और आत्मचिंतन की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि सच्ची खुशी बाहरी वस्तुओं में नहीं, बल्कि मन की शांति और संतुलन में निहित होती है।

अंत में प्रधानाचार्य ने विद्यालय परिवार की ओर से सभी छात्र-छात्राओं को बुद्ध पूर्णिमा की शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर विद्यालय के समस्त आचार्य, आचार्याएं एवं भैया-बहन उपस्थित रहे।