फोटो खिंचवाकर मजदूरों की छुट्टी, ठेके पर हो रहे काम! मनरेगा योजना पर उठे गंभीर सवाल
निष्पक्ष जन अवलोकन। पचपेड़वा (बलरामपुर)। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी मनरेगा योजना में पचपेड़वा विकास खंड की कई ग्राम पंचायतों में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और फर्जीवाड़े के आरोप सामने आ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि रोजगार सेवकों द्वारा मजदूरों की केवल फोटो और जीपीएस लोकेशन लेकर ऑनलाइन हाजिरी दर्ज कर दी जाती है, जबकि वास्तविक कार्य मशीनों और ठेकेदारों के माध्यम से कराया जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार ग्राम पंचायत बानगढ़ में 10 मई तथा पिपरी में 26 मई को इस संबंध में समाचार प्रकाशित होने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की। आरोप है कि मजदूरों को सुबह कार्यस्थल पर बुलाकर उनकी फोटो खींच ली जाती है और ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने के बाद उन्हें घर भेज दिया जाता है। इसके बाद कार्य ठेकेदारों के माध्यम से कराया जाता है। इसी प्रकार ग्राम पंचायत चौरासी में भी फर्जी मनरेगा कार्यों की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि खबरें प्रकाशित होने के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर कोई जांच नहीं की गई। रोजगार सेवक द्वारा फर्जी हाजिरी लगाकर सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप लगाया जा रहा है। वहीं ग्राम पंचायत गोबरी में भी लंबे समय से कागजों पर कार्य संचालित दिखाकर भुगतान लेने का मामला चर्चा में है। ग्रामीणों का आरोप है कि धरातल पर कार्य नगण्य है, जबकि अभिलेखों में काम पूरा दर्शाया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच कराई जाए तो मनरेगा में बड़े घोटाले का खुलासा हो सकता है। ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं और मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। इस संबंध में जब संवाददाता ने खंड विकास अधिकारी मोहित दुबे से दूरभाष पर संपर्क करने का प्रयास किया तो उनका फोन रिसीव नहीं हुआ। जवाब न मिलने से ग्रामीणों में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारियों की अनदेखी और कथित मिलीभगत के कारण क्षेत्र में चकमार्ग सहित अन्य विकास कार्यों में अनियमितताएं जारी हैं। अब देखना यह होगा कि लगातार उठ रहे सवालों और शिकायतों के बाद जिला प्रशासन मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करता है या फिर मनरेगा में फर्जीवाड़े के आरोप यूं ही दबे रहेंगे।









