ग्राम पंचायत सिसहनिया घोपलापुर में ग्राम निधि और मनरेगा धन के फर्जी भुगतान का आरोप, जांच की मांग तेज

ग्राम पंचायत सिसहनिया घोपलापुर में ग्राम निधि और मनरेगा धन के फर्जी भुगतान का आरोप, जांच की मांग तेज

निष्पक्ष जन अवलोकन। न्यूज़ ब्यूरो। पचपेडवा विकास खंड जनपद बलरामपुर की ग्राम पंचायत सिसहनिया घोपलापुर में सरकारी धन के खुलेआम दुरुपयोग और फर्जी भुगतान का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि ग्राम पंचायत में विकास कार्य केवल कागजों तक सीमित हैं, जबकि जमीनी स्तर पर अधिकांश कार्य अधूरे पड़े हुए हैं। लगभग डेढ़ लाख रुपये की लागत से चार कैटल सेट निर्माण कराए गए, लेकिन आज तक कोई भी निर्माण कार्य पूरी तरह तैयार नहीं हो सका। कहीं प्लास्टर अधूरा पड़ा है, कहीं दीवारों पर पेंटिंग नहीं हुई है तो कई जगह छत पर चद्दर तक नहीं लगाई गई। इसके बावजूद सरकारी अभिलेखों में कार्य पूर्ण दिखाकर पूरा भुगतान निकाल लिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम निधि और मनरेगा के पैसों का बड़े पैमाने पर बंदरबांट किया गया है। गांव में विकास कार्यों का कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं दिखाई दे रहा है, जबकि कागजों में लाखों रुपये खर्च दर्शाए गए हैं। आरोप है कि बिना कार्य कराए ही भुगतान कर दिया गया और सरकारी धन की खुली लूट की गई। ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग उठाई है। ग्रामीणों के अनुसार प्रधान मोहम्मद शब्बीर हसन के फर्जी दस्तखतों के सहारे भुगतान किया जा रहा है। आरोप है कि प्रधान प्रतिनिधि जुबेर अहमद और सचिव सौरभ श्रीवास्तव की मिलीभगत से फर्जी तरीके से धन निकासी की गई। ग्रामीणों का कहना है कि प्रधान स्वयं ग्राम पंचायत के कार्यों की जानकारी तक नहीं रखते और पांच वर्षों के कार्यकाल में एक भी खुली बैठक नहीं हुई। केवल कागजों में खानापूर्ति कर विकास कार्य दिखाए जाते रहे। सूत्रों के अनुसार मनरेगा में भी बिना काम कराए मजदूरी भुगतान किया गया है। ग्रामीणों ने बताया कि जुबेर प्रधान प्रतिनिधि ने दबंगई और पैसों के प्रभाव के दम पर लोगों को अपने पक्ष में कर रखा था, जिसके कारण गांव में लंबे समय से भ्रष्टाचार चलता रहा। संवाददाता द्वारा सचिव सौरभ श्रीवास्तव से दूरभाष पर संपर्क करने पर उन्होंने सवालों का जवाब देने से इंकार कर दिया। वहीं संबंधित अधिकारी मोहित दुबे से संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ। गौरतलब है कि 12 मई को भी इस मामले को लेकर खबर प्रकाशित की गई थी, लेकिन अब तक जिम्मेदार अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की। ग्रामीणों का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच हो जाए तो ग्राम पंचायत में कई और फर्जी भुगतान उजागर हो सकते हैं। पचपेडवा ब्लॉक मुख्यालय से मात्र तीन किलोमीटर दूर स्थित इस ग्राम पंचायत में खुलेआम भ्रष्टाचार के आरोप लगने से प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों ने शासन और प्रशासन से तत्काल जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।