पचपेड़वा क्षेत्र की कई ग्राम पंचायतों में राशन घोटाले का आरोप, गरीबों के हक पर डाका
निष्पक्ष जन अवलोकन। पचपेड़वा, बलरामपुर। विकास खंड पचपेड़वा एवं नगर पंचायत क्षेत्र में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत गरीबों को मिलने वाले राशन में बड़े पैमाने पर कथित अनियमितताओं, घटतौली और मनमानी के आरोप सामने आए हैं। कई ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों ने कोटेदारों पर सरकार द्वारा निर्धारित मात्रा से कम राशन और चीनी वितरण करने का आरोप लगाते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार गरीब परिवारों को खाद्यान्न उपलब्ध कराने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका लाभ पात्र लोगों तक पूरी तरह नहीं पहुंच पा रहा है। आरोप है कि कुछ कोटेदार राशन वितरण में खुलेआम कटौती कर गरीबों के हिस्से का अनाज हड़प रहे हैं। धनखरपुर हाटी क्षेत्र के कार्डधारकों ने आरोप लगाया कि उन्हें निर्धारित मात्रा से कम राशन दिया जाता है। शिकायत करने पर उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जाता और उन्हें टाल दिया जाता है। वहीं ग्राम पंचायत बंजरिया में कोटेदार राम सुमिरन पर अंत्योदय कार्डधारकों के राशन और चीनी में कटौती करने के आरोप लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जहां सरकार द्वारा तीन माह पर मिलने वाली चीनी का प्रावधान है, वहां अधिकांश कार्डधारकों को मात्र एक किलो चीनी दी जाती है, जबकि कई पात्र परिवारों को चीनी से वंचित रखा जाता है। इतना ही नहीं, अंत्योदय कार्डधारकों को 35 किलो के स्थान पर केवल 25 किलो राशन दिए जाने का आरोप भी लगाया गया है। पात्र गृहस्थी कार्डधारकों को प्रति यूनिट पांच किलो के बजाय मात्र तीन किलो राशन दिए जाने की शिकायतें भी सामने आई हैं। ग्राम पंचायत सदानगर में भी राशन वितरण को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों ने कोटेदार श्याम बहादुर पर आरोप लगाया है कि अंत्योदय कार्डधारकों को मिलने वाली तीन किलो चीनी के स्थान पर केवल डेढ़ किलो चीनी दी जाती है। आरोप यह भी है कि चीनी के बदले निर्धारित दर से अधिक धनराशि वसूली जाती है। राशन में भी कथित तौर पर कटौती कर शेष खाद्यान्न को अपने पास रख लेने की शिकायतें ग्रामीणों द्वारा की गई हैं। नगर पंचायत क्षेत्र बरगदवा सैफ में भी राशन वितरण को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार समाचार प्रकाशित होने और शिकायतें किए जाने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। इससे संबंधित कोटेदारों के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि दिनभर मेहनत-मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करने वाले गरीब परिवारों के सामने राशन की कटौती के कारण गंभीर खाद्य संकट की स्थिति उत्पन्न हो रही है। उनका आरोप है कि शिकायतों के बावजूद निष्पक्ष जांच नहीं कराई जा रही है और मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। इस संबंध में संवाददाता द्वारा सप्लाई इंस्पेक्टर से दूरभाष पर संपर्क कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन फोन की घंटी बजने के बाद कॉल काट दी गई, जिससे उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका। अब सवाल यह है कि यदि गरीबों के हिस्से का राशन वास्तव में काटा जा रहा है तो जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे हैं? क्षेत्रीय जनता ने जिलाधिकारी से मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है।









