मेडिकल कॉलेज में नौकरी दिलाने के नाम पर 1.20 लाख की ठगी, फर्जी नियुक्ति पत्र देने वाला गिरफ्तार

गोरखपुर के चिलुआताल क्षेत्र में मेडिकल कॉलेज में नौकरी दिलाने के नाम पर 1.20 लाख रुपये की ठगी करने वाले आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार किया। आरोपी ने फर्जी नियुक्ति पत्र और आईडी कार्ड भी दिया था।

मेडिकल कॉलेज में नौकरी दिलाने के नाम पर 1.20 लाख की ठगी, फर्जी नियुक्ति पत्र देने वाला गिरफ्तार
नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी के आरोपी को गिरफ्तार कर आवश्यक कार्रवाई करती चिलुआताल थाना पुलिस।

विभव पाठक

निष्पक्ष जन अवलोकन 

गोरखपुर। नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों को ठगी का शिकार बनाने वाले एक आरोपी को चिलुआताल पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी पर मेडिकल कॉलेज में नौकरी दिलाने का झांसा देकर एक महिला से 1.20 लाख रुपये लेने और फर्जी नियुक्ति पत्र व आईडी कार्ड देने का आरोप है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर अग्रिम विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है।

पुलिस के अनुसार, थाना चिलुआताल में दर्ज मुकदमा संख्या 167/2026 के तहत अभियुक्त विनय यादव पुत्र धुपराज यादव, निवासी ग्राम एकमा थाना पीपीगंज, को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तारी धोखाधड़ी और जालसाजी के मामलों पर अंकुश लगाने के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के दौरान की गई।

मामले में पीड़िता ने पुलिस को दी गई तहरीर में आरोप लगाया था कि विनय यादव ने मेडिकल कॉलेज में नौकरी लगवाने का भरोसा दिलाया। नौकरी दिलाने के नाम पर उसने अलग-अलग समय पर कुल 1 लाख 20 हजार रुपये ले लिए। रुपये लेने के बाद आरोपी ने विश्वास दिलाने के लिए एक कथित नियुक्ति पत्र और आईडी कार्ड भी उपलब्ध कराया।

कुछ समय बाद जब पीड़िता को दस्तावेजों की सत्यता पर संदेह हुआ और उसने जांच कराई, तब पता चला कि नियुक्ति पत्र और आईडी कार्ड फर्जी हैं। खुद को ठगा हुआ महसूस करने पर पीड़िता ने चिलुआताल थाने में शिकायत दर्ज कराई।

तहरीर के आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों और अन्य जानकारियों के आधार पर आरोपी की पहचान की गई और उसे गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि उसने अन्य लोगों को भी इसी तरह नौकरी का झांसा देकर ठगी का शिकार बनाया है या नहीं।

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि नौकरी दिलाने के नाम पर किसी भी व्यक्ति को धनराशि देने से पहले संबंधित संस्था और दस्तावेजों की पूरी जांच-पड़ताल अवश्य करें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें, ताकि इस प्रकार की धोखाधड़ी पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।