पीसीपीएनडीटी नियमों के उल्लंघन पर मथुरा के हार्ट इंस्टीट्यूट की अल्ट्रासाउंड व ईको मशीन सील

पीसीपीएनडीटी नियमों के उल्लंघन पर मथुरा के हार्ट इंस्टीट्यूट की अल्ट्रासाउंड व ईको मशीन सील

निष्पक्ष जन अवलोकन

राहुल शर्मा 

मथुरा। जनपद में अवैध चिकित्सा गतिविधियों पर रोक लगाने के उद्देश्य से प्रशासन लगातार सख्ती बरत रहा है। इसी क्रम में जिलाधिकारी के निर्देश पर पीसीपीएनडीटी (Pre-Conception and Pre-Natal Diagnostic Techniques) समिति द्वारा अल्ट्रासाउंड केंद्रों का औचक निरीक्षण अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत बुधवार को मथुरा स्थित एक हार्ट इंस्टीट्यूट का निरीक्षण किया गया, जहां गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। उप जिलाधिकारी सदर के नेतृत्व में गठित टीम, जिसमें पीसीपीएनडीटी के नोडल अधिकारी डॉ. चित्रेश कुमार निर्मल एवं अन्य सदस्य शामिल थे, ने संस्थान में पहुंचकर अभिलेखों और मशीनों की गहन जांच की। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि संस्थान द्वारा पीसीपीएनडीटी अधिनियम 1994 के तहत निर्धारित नियमों का पूर्ण रूप से पालन नहीं किया जा रहा था। कई आवश्यक दस्तावेज अधूरे पाए गए, जबकि कुछ रिकॉर्ड निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं थे। जांच टीम ने पाया कि अल्ट्रासाउंड से संबंधित जरूरी पंजीकरण एवं रिपोर्टिंग प्रक्रिया में भी लापरवाही बरती जा रही थी। इसके अलावा मशीनों के संचालन से जुड़े नियमों का भी उल्लंघन सामने आया। इन अनियमितताओं को गंभीर मानते हुए टीम ने मौके पर ही कार्रवाई करते हुए संस्थान की अल्ट्रासाउंड एवं ईको मशीन को सील कर दिया। अधिकारियों का कहना है कि पीसीपीएनडीटी अधिनियम का उद्देश्य भ्रूण लिंग जांच पर रोक लगाना और कन्या भ्रूण हत्या जैसी कुप्रथाओं को समाप्त करना है। ऐसे में इस अधिनियम के तहत निर्धारित नियमों का पालन करना प्रत्येक चिकित्सा संस्थान के लिए अनिवार्य है। नियमों की अनदेखी न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी अत्यंत संवेदनशील मामला है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जनपद में इस तरह के औचक निरीक्षण आगे भी जारी रहेंगे। जो भी केंद्र नियमों का उल्लंघन करते पाए जाएंगे, उनके खिलाफ इसी प्रकार सख्त कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने सभी अल्ट्रासाउंड संचालकों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने रिकॉर्ड को पूर्ण रूप से अद्यतन रखें और शासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करें। इस कार्रवाई के बाद जनपद के अन्य चिकित्सा संस्थानों में भी हड़कंप मच गया है। प्रशासन की इस सख्ती को कानून व्यवस्था और सामाजिक संतुलन बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।