गौशाला में तड़प-तड़प कर दम तोड़ रही गौ माता, जिम्मेदारों की चुप्पी पर उठे सवाल

गौशाला में तड़प-तड़प कर दम तोड़ रही गौ माता, जिम्मेदारों की चुप्पी पर उठे सवाल

निष्पक्ष जन अवलोकन। पचपेडवा विकासखंड, बलरामपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत नेटहवा में संचालित गौशाला की स्थिति अत्यंत दयनीय और चिंताजनक सामने आई है। यहां गौ माता की हालत इतनी खराब है कि वे भूख, प्यास और अव्यवस्था के कारण तड़प-तड़प कर अपनी जान गंवा रही हैं। स्थानीय ग्रामीणों और सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार गौशाला में न तो पर्याप्त चारे की व्यवस्था है, न ही पीने के पानी की कोई समुचित व्यवस्था दिखाई देती है। इसके साथ ही रहने के लिए भी सुरक्षित और स्वच्छ स्थान का अभाव है, जिससे गौवंश खुले आसमान के नीचे या रस्सियों से बंधे हुए कष्ट झेलने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गौशाला के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है, जबकि जमीनी हकीकत बेहद दर्दनाक है। कई गौ माता रस्सी से बंधी हुई भूख और प्यास से दम तोड़ चुकी हैं। मौके पर ली गई तस्वीरें इस बात की गवाही दे रही हैं कि गौशाला में किस प्रकार लापरवाही बरती जा रही है। हालात इतने खराब हैं कि कई गौ माता इधर-उधर भटकते हुए सड़कों पर आ जाती हैं, जिससे सड़क दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है और किसानों की फसलों को भी भारी नुकसान हो रहा है। बताया जा रहा है कि 4 मई को इस गौशाला का निष्पक्ष जन अवलोकन कर खबर भी प्रकाशित की गई थी, लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया। यह उदासीनता कई सवाल खड़े करती है कि आखिर कब तक गौ माता इस तरह तड़प-तड़प कर मरती रहेंगी और प्रशासन मूकदर्शक बना रहेगा। संवाददाता द्वारा जब इस मामले में खंड विकास अधिकारी मोहित दुबे से दूरभाष पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो फोन की घंटी लगातार बजती रही लेकिन कॉल रिसीव नहीं किया गया। इससे ग्रामीणों में आक्रोश और भी बढ़ गया है। लोगों का आरोप है कि अधिकारियों की मिलीभगत और लापरवाही के चलते ही गौशाला की यह दुर्दशा बनी हुई है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और गौशाला में तत्काल चारा, पानी और समुचित देखभाल की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि गौ माता को इस तरह असमय मौत का सामना न करना पड़े। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो यह स्थिति और भी भयावह हो सकती है, जिसका जिम्मेदार प्रशासन स्वयं होगा।