आईजीआरएस रैंकिंग ललितपुर ने प्रदेश में गाड़ा झंडा शिकायतों के निस्तारण में मिला छठा स्थान

मण्डल में पहले पायदान पर रहा ललितपुर, जिलाधिकारी ने 80% से अधिक फीडबैक और गुणवत्तापूर्ण समाधान को दिया श्रेय।

आईजीआरएस रैंकिंग ललितपुर ने प्रदेश में गाड़ा झंडा शिकायतों के निस्तारण में मिला छठा स्थान

निष्पक्ष जन अवलोकन। अरविन्द कुमार पटेल। ललितपुर। जन शिकायतों के त्वरित और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण में जनपद ललितपुर ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। समन्वित जन शिकायत प्रणाली आईजीआरएस की दिसंबर 2025 की रैंकिंग में जनपद को प्रदेश में 6वां स्थान और झाँसी मण्डल में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है। शासन द्वारा जारी रिपोर्ट में जनपद को 96.43 प्रतिशत अंक मिले हैं। गुणवत्ता और संतुष्टि पर विशेष जोर जिलाधिकारी सत्य प्रकाश के कुशल निर्देशन में मिली इस सफलता का सबसे महत्वपूर्ण पहलू आवेदकों की संतुष्टि रहा है। निस्तारण के बाद फीडबैक में 80% से अधिक शिकायतकर्ता संतुष्ट पाए गए हैं। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि केवल शिकायत का निस्तारण करना ही काफी नहीं है, बल्कि 'आवेदक की संतुष्टि' ही निस्तारण का असली मानक मानी जाएगी। जिलाधिकारी स्वयं हर महीने 50 संदर्भों की ग्रेडिंग कर गुणवत्ता की जांच कर रहे हैं। लापरवाह अधिकारियों पर शिकंजा आईजीआरएस के नोडल अधिकारी व अपर जिलाधिकारी अंकुर श्रीवास्तव ने बताया कि दिसंबर माह में जिन अधिकारियों के संदर्भ 'डिफाल्टर' श्रेणी में पाए गए, उन्हें चेतावनी व स्पष्टीकरण जारी किया गया है। अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि पोर्टल पर रिपोर्ट लगाने से पहले अनिवार्य रूप से शिकायतकर्ता से बात कर उनकी संतुष्टि जान ली जाए, ताकि मुख्यमंत्री कार्यालय से फीडबैक लेते समय स्थिति स्पष्ट रहे। आंकड़ों की नजर में जनपद की प्रगति ई-डिस्ट्रिक्ट मैनेजर अंशुल खरे द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार। कुल प्राप्त संदर्भ: 62,919 कुल निस्तारित मामले: 62,217 लंबित मामले (समय सीमा के अंदर): 702 प्रदेश रैंकिंग स्कोर: 96.43% विभिन्न श्रेणियों में निस्तारण की स्थिति: मुख्यमंत्री संदर्भ: 1327 में से 1291 का निस्तारण। जिलाधिकारी संदर्भ: 9267 में से 9005 का निस्तारण। पुलिस अधीक्षक संदर्भ: 9595 में से 9350 का निस्तारण। भारत सरकार संदर्भ: 2087 में से 2007 का निस्तारण। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि भविष्य में निस्तारण की गुणवत्ता में कोई कमी पाई गई, तो संबंधित विभाग के अधिकारी के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी।