सोनभद्र में अवैध बालू खनन बना बड़ा मुद्दा

सोनभद्र में अवैध बालू खनन बना बड़ा मुद्दा

निष्पक्ष जन अवलोकन/अमर नाथ शर्मा सोनभद्र / जिले में अवैध बालू खनन को लेकर एक बार फिर बड़ा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था और खनन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। एक ओर जिला प्रशासन द्वारा अवैध खनन के खिलाफ सख्ती के दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत इन दावों से बिल्कुल अलग नजर आ रही है। हाल ही में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में हुई बैठक में खनन, पुलिस, वन और परिवहन विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि अवैध खनन की सूचना मिलते ही तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। इसके बावजूद अवैध खनन का सिलसिला जारी है, जिससे प्रशासन की सख्ती पर सवाल उठ रहे हैं। पर्यावरण के लिए काम करने वाले पर्यावरण संरक्षक निर्भय चौधरी ने आरोप लगाया है कि खनन माफिया अधिकारियों की मिलीभगत से नियमों को दरकिनार कर नदियों में खुलेआम अवैध खनन कर रहे हैं। रेणुका नदी में मिले बालू खनन के पट्टे को मैसर्स-ओमेक्स मिनरल्स प्राइवेट लिमिटेड मनमाने ढंग से चला रहा है। उन्होंने बताया कि पोकलेन और लिफ्टर जैसी भारी मशीनों का उपयोग कर 40 से 50 फीट गहराई तक बालू निकाला जा रहा है, जबकि इस तरह के उपकरणों के इस्तेमाल की अनुमति नहीं है। इससे न केवल नदी की धारा प्रभावित हो रही है, बल्कि जलीय जीव-जंतुओं का भी भारी नुकसान हो रहा है और भविष्य में जल संकट की आशंका बढ़ रही है। नदियों को छलनी करने से नदी में नहाने वाले स्थानीय लोगों के लिए भी काल बन जाती है नहाने के दौरान अचानक गहरे गड्ढे में जाने से मौत की वजह भी बन सकती है।निर्भय चौधरी का आरोप है कि खनन विभाग के अधिकारी पूरे मामले में आंख मूंदे बैठे हैं या फिर जानबूझकर कार्रवाई नहीं कर रहे। उन्होंने कहा कि जब भी उच्चाधिकारियों की टीम जांच के लिए आती है, उससे पहले ही खनन कार्य बंद करा दिया जाता है और मशीनों को हटा दिया जाता है, जिससे वास्तविक स्थिति छिपाई जाती है। निर्भय चौधरी ने यह भी दावा किया कि ग्राम- खेबंधाः तहसील ओबरा जनपद- सोनभद्र स्थान पर मिले आवंटन की जगह से हटकर दूसरे जगहों पर खनन किया जा रहा है। बड़ी संख्या में खनन कार्य अवैध तरीके से संचालित हो रहे हैं और रात के समय भी लोडिंग जारी रहती है, जो नियमों के खिलाफ है। पर्यावरण कार्यकर्ता ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो वह इस मामले को उच्च न्यायालय और एनजीटी तक ले जाएंगे। इस पूरे मामले ने एक बार फिर प्रशासन की कार्यशैली और खनन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि आरोपों के बाद प्रशासन क्या कदम उठाता है।