भारत–यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते का वैश्विक स्वागत, अंतरराष्ट्रीय मीडिया, नेताओं और उद्योग जगत ने बताया ऐतिहासिक

भारत–यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते का वैश्विक स्वागत, अंतरराष्ट्रीय मीडिया, नेताओं और उद्योग जगत ने बताया ऐतिहासिक

निष्पक्ष जन अवलोकन। योगेश जायसवाल।

नई दिल्ली।भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को लेकर दुनिया भर से जोरदार और सकारात्मक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। अंतरराष्ट्रीय मीडिया, यूरोपीय राजनीतिक नेतृत्व, वैश्विक उद्योग जगत और नीति विशेषज्ञों ने इस समझौते को ऐतिहासिक, रणनीतिक और समय की मांग बताया है। आर्थिक लाभ के साथ-साथ भू-राजनीतिक दृष्टि से भी इसे एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

अंतरराष्ट्रीय मीडिया की सराहना

प्रमुख वैश्विक समाचार संस्थानों ने इस समझौते के दायरे और महत्व को प्रमुखता से रेखांकित किया है। ब्रिटेन के प्रतिष्ठित अखबार द टेलीग्राफ ने इसे “मदर ऑफ ऑल ट्रेड डील्स” बताते हुए कहा कि इस समझौते में भारत सबसे बड़ा रणनीतिक विजेता बनकर उभरा है। रिपोर्ट में बताया गया कि इससे यूरोपीय संघ के 96 प्रतिशत से अधिक निर्यात पर भारत में शुल्क कम या समाप्त होंगे, जबकि भारत के लगभग सभी उत्पादों पर यूरोपीय बाजार में शुल्क घटाए जाएंगे।

ब्लूमबर्ग ने लिखा कि भारत अब वैश्विक व्यापार में देशों के लिए एक प्रमुख और भरोसेमंद साझेदार बनता जा रहा है। द न्यूयॉर्क टाइम्स, वॉशिंगटन पोस्ट, गार्डियन, बीबीसी, रॉयटर्स, एसोसिएटेड प्रेस और अल जज़ीरा जैसे संस्थानों ने भी इस समझौते को विश्व व्यापार के इतिहास का एक बड़ा और निर्णायक कदम बताया है।

विदेशी नेताओं की प्रतिक्रिया

यूरोप के कई शीर्ष नेताओं ने इस समझौते का खुले तौर पर स्वागत किया है। जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने इसे आर्थिक विकास और समृद्धि के लिए सकारात्मक संकेत बताया। फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्ज़ेंडर स्टब ने इसे अब तक का सबसे बड़ा व्यापार समझौता करार दिया। स्वीडन, ऑस्ट्रिया, डेनमार्क और फ्रांस के नेताओं ने भी कहा कि यह समझौता नई आर्थिक साझेदारी और सुरक्षा सहयोग का मार्ग प्रशस्त करेगा।

उद्योग और कारोबारी जगत में उत्साह

यूरोपीय और वैश्विक उद्योग जगत ने इस समझौते को लंबे समय से प्रतीक्षित सफलता बताया है। विमानन, ऑटोमोबाइल, मशीनरी, रक्षा और विनिर्माण क्षेत्र से जुड़े उद्योग संगठनों का कहना है कि इससे निवेश बढ़ेगा, निर्यात को बढ़ावा मिलेगा और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं मजबूत होंगी। कई व्यापार संगठनों ने इसे संरक्षणवाद के दौर में मुक्त और नियम-आधारित व्यापार के लिए मजबूत संकेत बताया।

विशेषज्ञों और थिंक टैंकों की राय

अंतरराष्ट्रीय नीति विशेषज्ञों और थिंक टैंकों के अनुसार यह समझौता दशक के सबसे प्रभावशाली भू-आर्थिक समझौतों में से एक है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार में 40 से 60 प्रतिशत तक की वृद्धि संभव है, जिससे दोनों पक्षों की अर्थव्यवस्था और आय में बढ़ोतरी होगी।

कुल मिलाकर, भारत–ईयू मुक्त व्यापार समझौते को वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती आर्थिक शक्ति, रणनीतिक महत्व और भरोसेमंद साझेदारी की पुष्टि के रूप में देखा जा रहा है।