बिना कार्य कराए भुगतान, सरकारी धन की खुली लूट का आरोप क्षेत्र में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला सामने आया है। आरोप है कि बिना काम कराए ही भुगतान कर दिया गया। ग्रामीणों ने जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग उठाई है। मामले को लेकर अधिकारियों की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
विकासखंड पचपेड़वा जनपद बलरामपुर के ग्राम पंचायत सिसहनिया घोपलापुर में सरकारी धन के खुलेआम बंदरबांट का मामला सामने आया है। गांव में लगभग डेढ़ लाख रुपये की लागत से चार केटल सेट निर्माण कार्य कराया गया, लेकिन आज तक कोई भी निर्माण कार्य पूरी तरह से तैयार नहीं हो पाया। कहीं प्लास्टर अधूरा पड़ा है, कहीं दीवारों की पेंटिंग नहीं हुई, तो कहीं छत पर चद्दर तक नहीं लगाई गई। कई निर्माण कार्य आधे-अधूरे हाल में छोड़ दिए गए हैं, जबकि सरकारी अभिलेखों में पूरा भुगतान दिखाकर धन निकासी कर ली गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत में विकास कार्य केवल कागजों में पूरे दिखाए जा रहे हैं, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। अधूरे निर्माण कार्यों को देखकर साफ प्रतीत होता है कि जिम्मेदारों ने गुणवत्ता और मानकों को पूरी तरह दरकिनार कर सरकारी धन का दुरुपयोग किया है। गांव के लोगों का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच हो जाए तो बड़े घोटाले का खुलासा हो सकता है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सचिव सौरभ और प्रधान प्रतिनिधि जुबेर की मिलीभगत से सरकारी धन का बंदरबांट किया गया है। आरोप है कि निर्माण कार्य में घटिया सामग्री का प्रयोग किया गया और कई कार्य बिना पूरा किए ही भुगतान निकाल लिया गया। गांव के लोगों में इस मामले को लेकर भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि सरकार गांवों के विकास के लिए लाखों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी और पंचायत प्रतिनिधि विकास के नाम पर केवल अपनी जेब भरने में लगे हुए हैं। मीडिया टीम द्वारा जब मामले की जानकारी लेने के लिए सचिव सौरभ से दूरभाष पर संपर्क करने का प्रयास किया गया तो घंटी जाने के बावजूद संपर्क नहीं हो सका। वहीं संबंधित अधिकारी मोहित दुबे से बात की गई तो उन्होंने कहा कि मामले की जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अब बड़ा सवाल यह उठता है कि जब निर्माण कार्य अधूरे पड़े हैं तो आखिर पूरा भुगतान किस आधार पर किया गया? क्या अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी धन की लूट हो रही है? ग्रामीणों ने जिलाधिकारी बलरामपुर से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की है।









