कृषि विज्ञान केन्द्र, गनीवा में ग्रीष्मकालीन दलहन उत्पादन तकनीकी पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारम्भ
निष्पक्ष जन अवलोकन। । शिवसंपत करवरिया। चित्रकूट। ग्रीष्मकालीन दलहन उत्पादन को बढ़ावा देने एवं किसानों की आय में वृद्धि सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केन्द्र, गनीवा, चित्रकूट में ग्रीष्मकालीन दलहन उत्पादन तकनीकी विषय पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम उत्तर प्रदेश अनुसंधान परिषद, लखनऊ द्वारा प्रायोजित है। कार्यक्रम में जनपद के दो विकासखंडों के तीन ग्रामों से आए 25 कृषकों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य किसानों को जायद मौसम में मूंग सहित अन्य दलहनी फसलों की वैज्ञानिक खेती की उन्नत तकनीकों से अवगत कराते हुए फसल सघनता बढ़ाना, खाली भूमि का सदुपयोग करना तथा दलहन उत्पादन में वृद्धि करना है। प्रशिक्षण के प्रथम दिवस का शुभारम्भ कृषि विज्ञान केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. राजेन्द्र सिंह नेगी के मार्गदर्शन में हुआ। अपने उद्बोधन में उन्होंने ग्रीष्मकालीन दलहनी फसलों के महत्व, क्षेत्रीय संभावनाओं तथा किसानों की आय बढ़ाने में इनके योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जायद में मूंग जैसी अल्पावधि फसलों को अपनाकर किसान अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं तथा मृदा उर्वरता में भी सुधार ला सकते हैं। प्रशिक्षण के दौरान विभिन्न तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया, जिसमें विशेषज्ञों द्वारा विषयानुसार जानकारी प्रदान की गई। फसल वैज्ञानिक विजय गौतम ने उन्नत किस्मों, उपयुक्त बुवाई समय एवं बीज उपचार की वैज्ञानिक विधियों पर विस्तार से चर्चा की। डॉ. मनोज कुमार ने पोषक तत्व प्रबंधन एवं संतुलित उर्वरक उपयोग के बारे में जानकारी दी। वहीं रोहित कुमार एवं अभय कुमार द्वारा जल प्रबंधन, खरपतवार नियंत्रण एवं कीट-रोग प्रबंधन पर व्यावहारिक प्रदर्शन कराया गया। प्रशिक्षण संयोजक उत्तम कुमार त्रिपाठी, वैज्ञानिक (कृषि प्रसार) ने लागत कम कर उत्पादन बढ़ाने की तकनीकों पर विस्तृत जानकारी देते हुए किसानों को उन्नत कृषि पद्धतियों को अपनाने हेतु प्रेरित किया। कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागी 25 किसानों को मूंग की उन्नत किस्म ‘IPU 2-3’ का 5-5 किलोग्राम मिनी किट बीज वितरित किया गया, जिससे वे ग्रीष्मकालीन मौसम में इस उन्नत प्रजाति की खेती कर बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकें। साथ ही कमलाशंकर शुक्ला द्वारा समापन सत्र का संचालन किया गया। प्रथम दिवस के दौरान पंजीकरण एवं उद्घाटन सत्र का संचालन अंकुर एवं अभय द्वारा किया गया। कार्यक्रम में प्रतिभागियों के लिए भोजन, जलपान एवं चाय की व्यवस्था में अर्जुन सिंह का सहयोग रहा। कार्यक्रम की फोटो एवं वीडियोग्राफी का कार्य डॉ. सतीश पाठक द्वारा किया गया। कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों ने बताया कि ग्रीष्मकालीन दलहन फसलें न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक हैं, बल्कि मृदा की उर्वरता बढ़ाने, जल संरक्षण करने तथा पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के सफल आयोजन हेतु उत्तर प्रदेश अनुसंधान परिषद, लखनऊ के प्रति आभार व्यक्त करते हुए केन्द्र ने परिषद के महानिदेशक डॉ. संजय सिंह का विशेष धन्यवाद ज्ञापित किया तथा भविष्य में भी इसी प्रकार के मार्गदर्शन एवं सहयोग की अपेक्षा व्यक्त की। अंत में प्रतिभागी किसानों ने इस प्रशिक्षण कार्यक्रम को अत्यंत उपयोगी बताते हुए कृषि विज्ञान केन्द्र का आभार व्यक्त किया तथा जायद में दलहनी फसलों की खेती को अपनाने का संकल्प लिया।









