आचार्य अहिबरन सिंह जी की प्रथम पुण्यतिथि अत्यंत श्रद्धा,भक्ति और गरिमा

आचार्य अहिबरन सिंह जी की प्रथम पुण्यतिथि अत्यंत श्रद्धा,भक्ति और गरिमा

निष्पक्ष जन अवलोकन विजय राम जायसवाल फतेहपुर(बाराबंकी)।विद्या और संस्कार की सरस्वती शिशु मंदिर इंटर कॉलेज में आचार्य अहिबरन सिंह जी की प्रथम पुण्यतिथि अत्यंत श्रद्धा,भक्ति और गरिमा के साथ मनाई गई। विद्यालय प्रांगण भक्तिमय वातावरण से ओत-प्रोत रहा और समूचा परिसर श्रद्धा-सुमनों से महक उठा। कार्यक्रम का शुभारम्भ प्रबंध समिति प्रबंधक लाल बहादुर वर्मा एवं यशस्वी प्रधानाचार्य वीरेंद्र कुमार वर्मा द्वारा माँ सरस्वती तथा स्मृतिशेष आचार्य अहिबरन सिंह जी के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं पुष्पार्चन कर किया गया। दीप की ज्योति के साथ ही उपस्थित जनसमूह की आँखें श्रद्धा और स्मृतियों से नम हो उठीं। वरिष्ठ आचार्य दिनेश ने आचार्य अहिबरन सिंह जी के तप, त्याग और समर्पणमय जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहाकि उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन विद्यालय के उत्थान और संस्कार निर्माण हेतु अर्पितकर दिया। उन्होंने व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं और पारिवारिक प्राथमिकताओं से ऊपर उठकर सदैव विद्यालय और समाज को ही अपना परिवार माना। इसके उपरांत प्रबंध समिति के सदस्य विजय जैन, के.के.जैन, प्यारेलाल,रामनाथ सोनी,समाजसेवी चौधरीकमलेश व संगत के बाबा हेमंतदास सहित अनेक प्रबुद्ध व्यक्तियों ने श्रद्धासुमन अर्पित किए। वक्ताओं ने आचार्य जी के व्यक्तित्व को प्रेरणा का जीवंत स्रोत बताया। विद्यालय प्रबंधक ने अपने उद्बोधन में कहा कि “आचार्य जी का जीवन त्याग और सेवा का अद्वितीय उदाहरण है, जिसे सदैव स्मरण रखा जाएगा।” विद्यालय कोषाध्यक्ष ने कहा कि आचार्य जी द्वारा देखे गए विद्यालय को डिग्री कॉलेज बनाने के स्वप्न को साकार करना हम सबका कर्तव्य और दायित्व है। प्रधानाचार्य वीरेंद्र कुमार वर्मा ने कहा कि ऐसे महापुरुष विरले ही जन्म लेते हैं, जो समाज और राष्ट्र के लिए अपना सर्वस्व अर्पित कर देते हैं। उनका जीवन हम सबके लिए प्रेरणास्त्रोत है। आचार्य जी की पुत्री अभिलाषा वर्मा, बहू एकता वर्मा, तथा विद्यालय परिवार के आचार्यगण—जयकिशोर, प्रदीप कश्यप, राजकुमार, अनूप वर्मा, आनंद कुमार, प्रीती सिंह, प्रिया सिंह सैनी सहित में मौजूद लगभग 950 भैया-बहनों ने श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम का समापन मंगल मंत्र के साथ हुआ। संपूर्ण वातावरण में एक ही संकल्प गूंज रहा था आचार्य जी के आदर्शों पर चलकर विद्यालय को नई ऊंचाइयों तक पहुँचाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।”