रनिया में आस्था और परंपरा का संगम, आशा दूज पर महिलाओं ने की मां कांखिया देवी में पूजा

रनिया में आस्था और परंपरा का संगम, आशा दूज पर महिलाओं ने की मां कांखिया देवी में पूजा

निष्पक्ष जन अवलोकन।

अंकित तिवारी।

कानपुर देहात के रनिया क्षेत्र में आशा दूज का पावन पर्व पूरे श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर महिलाओं ने मां कन्हैया देवी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि, संतानों की लंबी आयु और वंश वृद्धि की कामना की।

विस्तार

रनिया क्षेत्र के विभिन्न गांवों और मोहल्लों में सुबह से ही धार्मिक माहौल देखने को मिला। महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सज-धज कर एकत्रित हुईं और मां कन्हैया देवी के मंदिर व घरों में स्थापित पूजन स्थलों पर विशेष पूजा-अर्चना की। इस दौरान कलश स्थापना कर रोली, अक्षत, धूप-दीप के साथ विधिपूर्वक पूजा की गई और हलवा-पूरी का भोग अर्पित किया गया। पूजा के दौरान महिलाओं ने ‘आस माता’ की कथा का श्रवण किया, जिसमें ‘आसलिया बावलिया’ की कथा सुनाई गई। कथा के माध्यम से जीवन में आस्था, संयम और परिवार के प्रति समर्पण का संदेश दिया गया। इस दिन व्रत रखने वाली महिलाओं ने पूरे दिन निर्जल या फलाहार व्रत रखकर परिवार के सुख-समृद्धि की कामना की। जिन परिवारों में हाल ही में बेटे का जन्म या विवाह हुआ है, वहां विशेष रूप से उद्यापन की परंपरा निभाई गई। इस दौरान सास को ‘बायना’ देकर आशीर्वाद लिया गया। 

धार्मिक महत्व

 आशा दूज का व्रत उत्तर भारत के कई हिस्सों में विशेष महत्व रखता है। यह व्रत मुख्य रूप से महिलाएं अपने परिवार के कल्याण, संतान सुख और सौभाग्य की प्राप्ति के लिए करती हैं। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर मां आस माता की कृपा से घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।

स्थानीय माहौल

रनिया में इस पर्व को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला। मंदिरों में भजन-कीर्तन का आयोजन हुआ और महिलाओं ने सामूहिक रूप से पूजा कर एक-दूसरे को बधाई दी। पूरे क्षेत्र में धार्मिक और सकारात्मक वातावरण बना रहा।आशा दूज का यह पर्व रनिया में न केवल आस्था का प्रतीक बना, बल्कि सामाजिक एकता और पारंपरिक संस्कृति को भी मजबूती प्रदान करता नजर आया।