मनरेगा की खुली लूट, गरीब मजदूरों के हक पर डाका
निष्पक्ष जन अवलोकन। गैसड़ी( बलरामपुर )क्षेत्र से मनरेगा में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े की चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। सूत्रों से मिली जानकारी और मीडिया टीम की ज़मीनी पड़ताल ने उस सिस्टम को बेनकाब कर दिया है, जो काग़ज़ों में गरीबों को रोज़गार दे रहा है और हकीकत में उनके हक को लील रहा है। ग्राम पंचायत लक्ष्मी नगर निश्चल डीह में चार मास्टर रोल पर 37 मजदूरों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज पाई गई। लेकिन जब मीडिया की टीम कार्यस्थल पर पहुंची, तो एक भी मजदूर नजर नहीं आया। गांव वालों ने बताया कि काम के नाम पर सिर्फ फोटो से फोटो लिया जा रहा है, जबकि जमीन पर कोई काम नहीं हो रहा। काग़ज़ों में सब कुछ दुरुस्त दिखाया जा रहा है, पर हकीकत सिफर है। दूसरा मामला ग्राम पंचायत नए नगर का है, जहां तीन मास्टर रोल पर 29 मजदूरों की ऑनलाइन उपस्थिति दिखाई गई। कार्यस्थल पर मीडिया टीम पहुंची तो वहां भी सन्नाटा पसरा मिला। ग्रामीणों ने बताया कि यहां काम काफी समय पहले हो चुका था, फिर भी आज तक मजदूरों की ऑनलाइन हाजिरी लगाकर भुगतान की तैयारी चल रही है। तीसरा और सबसे गंभीर मामला ग्राम पंचायत त्रिकुलिया का है। यहां 13 मास्टर रोल पर 118 मजदूरों की ऑनलाइन अटेंडेंस दर्ज की गई। लेकिन मौके पर मीडिया टीम को महज 15 मजदूर काम करते मिले। सवाल उठता है कि बाकी 103 मजदूर आखिर कहां हैं? क्या उनकी मेहनत सिर्फ काग़ज़ों में है? मनरेगा योजना का उद्देश्य गरीब, मजदूर और बेरोज़गार को सम्मानजनक रोज़गार देना है, लेकिन गैसड़ी क्षेत्र में यह योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती दिख रही है। यह सिर्फ पैसों की लूट नहीं, बल्कि उन गरीब परिवारों के सपनों की हत्या है जो दो वक्त की रोटी के लिए मनरेगा पर निर्भर हैं।