गैसड़ी विकासखंड में मनरेगा का महाघोटाला! मजदूरों की ऑनलाइन हाजिरी, मैदान में सुनसान कार्यस्थल सरकारी धन की लूट, सिस्टम में बैठे जिम्मेदारों के गजब भेदी किरदार बेनक़ाब
निष्पक्ष जन अवलोकन। गैसड़ी विकासखंड, जनपद बलरामपुर से एक बार फिर मनरेगा में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक कई ग्राम पंचायतों में ऑनलाइन हाजिरी तो भर दी जाती है, लेकिन धरातल पर मजदूर या तो मिलते ही नहीं या बेहद कम संख्या में पाए जाते हैं। मजदूरों के हक का सीधा डाका डालते हुए सिर्फ फोटो से फोटो लेकर अटेंडेंस दिखाकर सरकारी धन का बंदरबांट किया जा रहा है। सबसे पहला मामला ग्राम पंचायत भगवानपुर का है, जहां 6 मास्टर रोल पर 53 मजदूरों की ऑनलाइन उपस्थिति दिखाई गई, जबकि मौके पर सिर्फ 6 मजदूर ही मिले। यह स्थिति साफ बताती है कि कार्यस्थल पर काम न होने के बावजूद भारी संख्या में मजदूर दिखाए गए। दूसरे नंबर पर ग्राम पंचायत सोनपुर है, जहां 7 मास्टर रोल पर 62 मजदूरों की हाजिरी दर्ज है, लेकिन मौके पर कोई काम नहीं हो रहा। स्थानीय लोगों ने बताया कि मजदूरों को काम पर बुलाया ही नहीं जाता — सिर्फ पुरानी फोटो से नई फोटो बनाकर ऑनलाइन अटेंडेंस लगा दी जाती है। तीसरे मामले में ग्राम पंचायत चौकिया में 3 मास्टर रोल पर 25 मजदूरों की ऑनलाइन हाजिरी दिखाई गई, जबकि जमीन पर सिर्फ फोटो की जुगाड़ कर के अटेंडेंस भर दी जाती है। ग्राम पंचायत नथईडिह में 3 मास्टर रोल पर 24 मजदूर, चौबेपुर में 1 मास्टर रोल पर 30 मजदूर, और 6 व पंचायत मुतेहारा में 4 मास्टर रोल पर 22 मजदूरों की उपस्थिति ऑनलाइन दर्ज है, लेकिन अधिकतर कार्यस्थलों पर मजदूर नदारद पाए गए। सबसे हैरान करने वाली बात यह कि जब संवाददाता ने इस पूरे मामले पर संबंधित अधिकारी और BDO से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की, तो कॉल काट दी गई और दोबारा फोन नहीं उठाया गया। इससे साफ जाहिर होता है कि पूरे प्रकरण में कहीं न कहीं मिलीभगत की बू आती है। गरीब मजदूर, जो रोज़ के संघर्ष में अपनी रोज़ी-रोटी के लिए मनरेगा पर निर्भर हैं, वे कार्य न चलने के कारण हक का पैसा भी नहीं पा रहे। मजदूरों में भारी आक्रोश है और वे निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। भ्रष्टाचार का यह खेल प्रशासन की आंखों के सामने खुलेआम जारी है और जिम्मेदार अधिकारी खामोश बने हुए हैं।