होली को यज्ञ और पर्यावरण शुद्धि का पर्व बनाएं: आचार्य संजीव रूप
निष्पक्ष जन अवलोकन
बदायूं/बिल्सी। तहसील क्षेत्र के गांव गुधनी स्थित प्रज्ञा यज्ञ मंदिर में रविवार को आर्य समाज का साप्ताहिक सत्संग श्रद्धा और उत्साह के साथ आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार के साथ यज्ञ द्वारा हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं ने आहुति देकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। यज्ञ के उपरांत अंतर्राष्ट्रीय वैदिक विद्वान आचार्य संजीव रूप ने उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि पर्व पवित्रता के साथ मनाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि होली, दीपावली जैसे त्योहारों को केवल मनोरंजन का साधन बना दिया गया है, जबकि इनका मूल उद्देश्य आत्मशुद्धि और पर्यावरण शुद्धि है। शराब सेवन, आतिशबाजी, गंदे रासायनिक रंगों का प्रयोग और व्यर्थ में लकड़ी जलाना जैसे कृत्य पर्व की पवित्रता को नष्ट करते हैं। उन्होंने कहा कि होली यज्ञ का पर्व है और इसे पर्यावरण शुद्धि के रूप में मनाया जाना चाहिए। हरे पेड़ों की लकड़ी या चोरी से लाई गई लकड़ी होली में नहीं लगानी चाहिए। लकड़ी कम मात्रा में तथा गोबर के कंडे अधिक मात्रा में प्रयोग करने चाहिए। प्रत्येक होली में 10 से 20 किलो तक यज्ञ सामग्री अर्पित करनी चाहिए। घरों में भी होली की अग्नि में सामग्री डालने से पर्यावरण शुद्ध होता है और रोग-शोक दूर होते हैं। इस अवसर पर प्रश्रय आर्य जय ने वेद मंत्रों की व्याख्या कर भजन प्रस्तुत किया। इस मौके पर राकेश आर्य, जयप्रकाश आर्य, विशेष कुमार, पंजाब सिंह, सूरजवती देवी, श्रीमती कमलेश देवी, गुड्डू देवी, सरोज देवी सहित अन्य श्रद्धालु मौजूद रहे।