राम बनकर जियो या रावण बनकर आपकी मर्जी : प्रश्रय आर्य

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राम बनकर जियो या रावण बनकर आपकी मर्जी : प्रश्रय आर्य

बिल्सी। तहसील क्षेत्र के गांव गुधनी स्थित आर्य समाज प्रज्ञा यज्ञ मंदिर में रविवार को आर्य समाज का साप्ताहिक सत्संग आयोजित किया गया। कार्यक्रम में आर्य समाज के भजनोपदेशक पंडित प्रश्रय आर्य जय ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यज्ञ संपन्न कराया। यज्ञ के पश्चात प्रवचन में उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन अनमोल है और यह युगों-युगों के शुभ कर्मों का परिणाम है। मनुष्य जन्म पाकर व्यक्ति के पास अच्छे और बुरे दोनों प्रकार के कर्म करने का अवसर होता है। उन्होंने कहा कि इंसान चाहे तो रावण बनकर भी जीवन जी सकता है और चाहे तो राम बनकर भी दुनिया में आदर्श स्थापित कर सकता है। यह पूरी तरह मनुष्य पर निर्भर करता है कि वह किस मार्ग का चयन करता है। यदि बुराई के रूप में जीना है तो रावण जैसे कर्म होंगे और यदि अच्छाई के रूप में जीवन जीना है तो राम जैसे कर्म करने होंगे। सत्संग के दौरान कमलेश रानी, कौशिकी रानी, आराध्या और उर्वशी ने भजनों की प्रस्तुति देकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इस मौके पर पंजाब सिंह, विनीत कुमार सिंह, अनुज कठेरिया, दुर्वेश कुमार, राकेश आर्य, सरोज देवी, संतोष कुमारी आदि मौजूद रहे।