14 माह के बच्चे के पेट से 2.5 इंच की नुकीली स्क्रू एंडोस्कोपी से निकाली, सिटी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल की टीम ने बचाई जान

गोरखपुर के सिटी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में 14 महीने के बच्चे के पेट से 2.5 इंच लंबी नुकीली स्क्रू को एंडोस्कोपी और कोलोनोस्कोपी के जरिए सफलतापूर्वक निकाला गया। डॉक्टरों ने बिना बड़े ऑपरेशन के बच्चे की जान बचाई।

14 माह के बच्चे के पेट से 2.5 इंच की नुकीली स्क्रू एंडोस्कोपी से निकाली, सिटी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल की टीम ने बचाई जान
सिटी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में एंडोस्कोपी के जरिए 14 महीने के बच्चे के पेट से निकाली गई 2.5 इंच लंबी स्क्रू।
14 माह के बच्चे के पेट से 2.5 इंच की नुकीली स्क्रू एंडोस्कोपी से निकाली, सिटी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल की टीम ने बचाई जान
14 माह के बच्चे के पेट से 2.5 इंच की नुकीली स्क्रू एंडोस्कोपी से निकाली, सिटी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल की टीम ने बचाई जान
14 माह के बच्चे के पेट से 2.5 इंच की नुकीली स्क्रू एंडोस्कोपी से निकाली, सिटी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल की टीम ने बचाई जान

विभव पाठक /ब्यूरो चीफ 

निष्पक्ष जन अवलोकन 

गोरखपुर।

सिटी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में डॉक्टरों की तत्परता और आधुनिक चिकित्सा तकनीक की बदौलत 14 महीने के एक बच्चे की जान बचा ली गई। बच्चे ने खेलते समय लगभग 2.5 इंच लंबी नुकीली कारपेंटर स्क्रू निगल ली थी, जिसे डॉक्टरों ने एंडोस्कोपी और कोलोनोस्कोपी की मदद से सफलतापूर्वक निकाल लिया। राहत की बात यह रही कि पूरी प्रक्रिया बिना किसी बड़े ऑपरेशन के पूरी हुई और बच्चा अब पूरी तरह सुरक्षित है।

जानकारी के अनुसार सिद्धार्थनगर क्षेत्र से एक 14 माह के बच्चे को गंभीर स्थिति में लगभग 100 किलोमीटर दूर से देर रात करीब 2 बजे सिटी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल लाया गया। बच्चे ने खेलते समय लकड़ी में प्रयोग होने वाली नुकीली स्क्रू निगल ली थी। यह स्थिति बेहद खतरनाक मानी जाती है, क्योंकि नुकीली वस्तु आंत में छेद (परफोरेशन), संक्रमण या आंत फटने जैसी गंभीर जटिलताएं पैदा कर सकती है।

अस्पताल पहुंचने से पहले ही मेडिकल टीम को सूचना दे दी गई थी, जिसके चलते डॉक्टर पूरी तैयारी के साथ मौजूद थे। बच्चे का तुरंत परीक्षण कर एक्स-रे कराया गया, जिसमें पता चला कि स्क्रू पेट से आगे बढ़कर आंतों की ओर जा चुकी है।

सबसे पहले पेडियाट्रिक एंडोस्कोपी के जरिए स्क्रू निकालने का प्रयास किया गया। गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. विवेक मिश्रा और उनकी टीम ने रात करीब 2:15 बजे आपातकालीन एंडोस्कोपी की। इस दौरान इसोफेगस, पेट और छोटी आंत के शुरुआती हिस्से तक जांच की गई, लेकिन वहां स्क्रू दिखाई नहीं दी।

इसके बाद फ्लोरोस्कोपी (लाइव एक्स-रे) से पुष्टि हुई कि स्क्रू आंतों में आगे बढ़ चुकी है। चूंकि बच्चे की स्थिति स्थिर थी और आंत में छेद या पेरिटोनाइटिस के कोई लक्षण नहीं थे, इसलिए डॉक्टरों ने बच्चे को निगरानी में रखने का निर्णय लिया।

बच्चे को पीडियाट्रिक यूनिट में भर्ती कर हर चार घंटे में सीरियल एक्स-रे के माध्यम से निगरानी की गई। कुछ समय बाद स्क्रू टर्मिनल इलियम के पास जाकर रुक गई और आगे नहीं बढ़ी। स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने बड़े ऑपरेशन से बचने के लिए कोलोनोस्कोपी करने का फैसला लिया।

कोलोनोस्कोपी के दौरान पूरे कोलन की जांच की गई और टर्मिनल इलियम में प्रवेश करने पर स्क्रू मल में फंसी हुई दिखाई दी। इसके बाद एंडोस्कोपिक उपकरणों की मदद से अत्यंत सावधानीपूर्वक स्क्रू को बाहर निकाल लिया गया।

इस जटिल प्रक्रिया में एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. विकास नारायण सिंह, ओटी असिस्टेंट प्रिंस गुप्ता, हृदय दुबे, किशन सहित अन्य स्टाफ का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।

गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. विवेक मिश्रा ने बताया कि बच्चों में फॉरेन बॉडी निगलने के कई जटिल मामलों को एंडोस्कोपी के माध्यम से सफलतापूर्वक संभाला गया है। उन्होंने कहा कि नुकीली स्क्रू जैसी वस्तुएं बेहद जोखिम भरी होती हैं, क्योंकि यह आंतों में किसी भी स्थान पर छेद कर सकती हैं और स्थिति जानलेवा हो सकती है।

डॉक्टरों की सलाह

डॉक्टरों का कहना है कि यदि किसी बच्चे ने गलती से सिक्का, बैटरी, स्क्रू या कोई अन्य वस्तु निगल ली हो तो तुरंत अस्पताल में जांच करानी चाहिए। घरेलू उपाय जैसे तेल पिलाना, केला खिलाना या अन्य देसी उपाय करना खतरनाक हो सकता है और इससे जटिलताएं बढ़ सकती हैं।