सिसहनिया ग्राम पंचायत में सरकारी धन गबन का आरोप, अधूरे पड़े कैटल सेट पर उठे सवाल

सिसहनिया ग्राम पंचायत में सरकारी धन गबन का आरोप, अधूरे पड़े कैटल सेट पर उठे सवाल

निष्पक्ष जन अवलोकन। संवाददाता विकासखंड पचपेडवा जनपद बलरामपुर की ग्राम पंचायत सिसहनिया में सरकारी धन के कथित गबन का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। ग्रामीणों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि पंचायत में चार कैटल सेट निर्माण कार्य कागजों में पूरा दिखाकर लाखों रुपये का भुगतान निकाल लिया गया, जबकि जमीनी हकीकत आज भी अधूरे निर्माण की कहानी बयां कर रही है। आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी पूरे मामले पर आंख मूंदकर बैठे हैं और शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार एक कैटल सेट पर लगभग डेढ़ लाख रुपये का भुगतान किया गया। चार कैटल सेट के नाम पर कुल लाखों रुपये सरकारी खाते से निकाले गए, लेकिन मौके पर आज भी अधूरा निर्माण पड़ा हुआ है। कई स्थानों पर केवल नींव और अधूरी दीवारें दिखाई दे रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच करा दी जाए तो बड़ा घोटाला सामने आ सकता है। बताया जा रहा है कि इस मामले को लेकर 8 मई को “निष्पक्ष जन अवलोकन” समाचार पत्र में खबर भी प्रकाशित हुई थी, लेकिन उसके बाद भी प्रशासनिक अधिकारियों की नींद नहीं टूटी। लोगों में चर्चा है कि जिम्मेदार अधिकारी कुंभकरण की नींद सो रहे हैं और सरकारी धन की खुली लूट पर पर्दा डालने का काम कर रहे हैं। शिकायत के बाद भी जांच टीम मौके पर नहीं पहुंची, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। ग्राम पंचायत में सचिव सौरभ, प्रधान शब्बीर तथा प्रधान प्रतिनिधि जुबेर पर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी योजनाओं के नाम पर मोटी रकम निकाल ली गई और विकास कार्यों को अधूरा छोड़ दिया गया। गांव के लोगों का कहना है कि यदि पंचायत के सभी विकास कार्यों की गहन जांच करा दी जाए तो और भी कई गड़बड़ियां उजागर हो सकती हैं। स्थानीय लोगों ने जिलाधिकारी बलरामपुर तथा उच्च अधिकारियों से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, भुगतान से संबंधित अभिलेखों की जांच हो तथा अधूरे कार्यों का सत्यापन कराया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो सरकारी योजनाओं का पैसा इसी तरह भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ता रहेगा और गांव का विकास केवल कागजों तक सीमित रह जाएगा। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले को कितनी गंभीरता से लेता है या फिर शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी यूं ही चुप्पी साधे बैठे रहेंगे।