माता से कोई भी उऋण नहीं हो सकता है- जटा शंकर

माता से कोई भी उऋण नहीं हो सकता है- जटा शंकर

निष्पक्ष जन अवलोकन।

अनिल तिवारी।

भदोही। औराई क्षेत्र के कोईलरा में स्थित साधु कुटिया हिन्दू सम्मलेन का आयोजन किया गया। जहां पर मुख्य अतिथि अनिल जी के रूप में रहे। कार्यक्रम में अतिथियों का अंगवस्त्रम और माल्यार्पण कर स्वागत किया गया। कार्यक्रम में हवन का भी आयोजन किया गया जहां पर भारी संख्या में लोगों ने सामूहिक हवन किया। मुख्य अतिथि अनिल जी ने कहा कि राष्ट्र के लिए एक होने का कार्यक्रम काफ़ी सराहनीय है, हिन्दू होने पर गर्व है। कुछ लोग देश को बाटने का प्रयास कर रहे है। सभी लोग भारत माता के बारे में जाने और राक्षसी प्रवृत्तियों से सावधान रहने की जरूरत है, देश और धर्म के बारे में जानना ही सच्ची देशभक्ति है, सभी लोग जागरूक रहे। जो हिन्दू धर्म के प्रति फालतू बयान बाजी करें उनको भगाना है। सभी लोग अपने छतों पर भगवा रंग का ध्वज लगाएंगे और भारत को अखंड बनाने का संकल्प ले, सभी लोग एक रहे। राज़्यपाल पुरस्कार से सम्मानित अध्यापिका ज्योति ने कहा कि कोई ऐसा कार्य करें जिससे अपने नजरों से खुद को न गिरा पाए। मुख्य वक्ता जटा शंकर ने कहा कि सभी हिन्दू सहोदार भाई है, कभी भी हिन्दू पतित नहीं बल्कि पवित्र होता है, हिन्दू की रक्षा करना ही हमारा संकल्प है। जटा शंकर ने स्वयं सेवक संघ की स्थापना और लक्ष्य के बारे में लोगों को विस्तार से बताया। हिन्दुओं को बाँटने की साजिश की गई जबकि हिन्दू की कोई जाति नहीं है, हिंदू सनातन है। सनातन सदैव सास्वत रहा है, किसी ने हिन्दू धर्म का निर्माण किसी ने नहीं किया है। इसका स्वयं परम पिता परमात्मा ने किया है। हिन्दू धर्म के अलावा अन्य धर्म या सम्प्रदाय का निर्माण किया गया। भगवान का अवतार हिन्दू धर्म को और मजबूत करने के लिए होता है। जितने भी हिन्दू है सभी एक है और इसी तरह हमेशा एक रहने की जरूरत है। विवाह के जातियों की रचना जरूरी है लेकिन सामाजिक रूप से हम सभी एक है, और देश की रक्षा करना हमारा धर्म है। कुछ राजनीतिक लोग हमें आपको बाटने का प्रयास करते है। जब देश सुरक्षित रहेगा तो हम सभी सुरक्षित रहेंगे। संस्कार व्यक्ति का आवरण होता है, इसलिए संस्कार कोई बंधन नहीं बल्कि एक अच्छे कार्य से अपने को स्थापित करने की जरूरत है। मनुष्य का कर्म ही सबसे श्रेष्ठ है। अपने कर्म से लोग बड़े बड़े इतिहास लिखते है। कोई भी चार वर्णों के अलावा पांचवे वर्ण की रचना कोई नहीं कर सकते है। कभी लालच देकर कभी अन्य माध्यमो से लोगों का धर्म परिवर्तन कराने का प्रयास विधर्मी कर रहे है, इनसे हमें सावधान रहने की जरूरत है। अपने धर्म में जीना और मरना ही सबसे बड़ा पुण्य है। जो लालच में पड़ता है उसका यह जन्म और परलोक दोनों दुखदायी है। कार्यक्रम का समापन भारत मां के आरती और प्रसाद के साथ हुआ। इस मौके पर ज्योति,नंदलाल पाण्डेय, तोषराम बिन्द, मुकेश माधव, संतोष,दीपक ,मिथिले , अंशुमान समेत भारी संख्या में लोग मौजूद रहे।