मनरेगा में छुपे घोटाले का बड़ा खुलासा: पीली ईंटों से निर्माण हो रहा है पुल बना सामुदायिक शौचालय वर्षों से बंद, अधिकारियों की अनदेखी जारी छुपी खबरों पर अब तक कार्रवाई नहीं
निष्पक्ष जन अवलोकन। विकासखंड पचपेड़वा (बलरामपुर) में मनरेगा कार्यों में हो रहे लगातार फर्जीवाड़े की परतें एक-एक करके खुलती जा रही हैं। 27 नवंबर को निष्पक्ष जन अवलोकन द्वारा खबर प्रकाशित की गई, लेकिन हैरानी की बात यह है कि संबंधित अधिकारियों के कानों तक जूं तक नहीं रेंगी। इससे साफ पता चलता है कि अधिकारियों और पंचायत स्तर के जिम्मेदारों के बीच गहरी मिलीभगत से गरीब मजदूरों के हक पर सीधा डाका डाला जा रहा है। संवाददाता ने जब दूरभाष पर मोहित दुबे से संपर्क किया तो उन्होंने मात्र इतना कहा कि “जब जांच करने वाले अधिकारी आएंगे तब आपको सूचना दे दी जाएगी।” इस तरह की टालमटोल भरी प्रतिक्रिया साफ दर्शाती है कि यदि ईमानदार जांच हो जाए तो कई अधिकारियों और प्रधानों को जेल तक जाना पड़ सकता है। लेकिन मिलीभगत की गहरी जड़ें अब भी व्यवस्था को जकड़े हुए हैं। ग्राम पंचायत खादगौरा में मनरेगा के तहत बना सामुदायिक शौचालय वर्षों से बंद पड़ा है। पंचायत भवन भी ताले में जकड़ा रहता है। गरीबों का कोई काम नहीं होता, मजबूरी में उन्हें बाहर ही शौच के लिए जाना पड़ता है। शौचालय निर्माण पर खर्च हुआ लाखों का सरकारी धन मानो पानी में बह गया हो। ग्राम पंचायत बैरिहवा में पीली ईंटों से पुल (फूल) निर्माण की प्रक्रिया चल रही थी, लेकिन जमीन पर हकीकत कुछ और ही मिली। गुणवत्ता और सत्यता पर गंभीर सवाल खड़े हैं। ग्राम पंचायत ठरुवलिया में तो मनरेगा कार्य स्थल पर एक भी मजदूर की उपस्थिति नहीं मिली, जबकि ऑनलाइन हाजिरी पूरी दिखाई जा रही है। यह फर्जीवाड़ा मजदूरों के नाम पर करोड़ों की बंदरबांट का खुला प्रमाण है। एक तरफ मजदूर रोजगार की तलाश में भटक रहे हैं, दूसरी तरफ सरकारी पोर्टल पर हाजिरी पूरी दिखाकर पैसा हड़पा जा रहा है। मनरेगा जैसी गरीबोन्मुखी योजना का इस तरह दुरुपयोग पूरे सिस्टम पर सवाल खड़ा करता है।