जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कैंप कार्यालय में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।
निष्पक्ष जन अवलोकन। । शिवसंपत करवरिया। चित्रकूट।जिलाधिकारी पुलकित गर्ग की अध्यक्षता में कैंप कार्यालय में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले के कृषिगत विकास एवं दलहन उत्पादन क्षेत्र में वृद्धि के उद्देश्य से विभिन्न बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा की गई। माननीय जिलाधिकारी महोदय की मंशानुसार ग्रीष्मकालीन मूंग उत्पादन हेतु जिले में 500 एकड़ क्षेत्रफल आच्छादित करने की योजना प्रस्तावित की गई। इसके अंतर्गत चयनित किसानों का मृदा परीक्षण कराते हुए उन्हें उन्नत एवं प्रमाणित किस्म का बीज उपलब्ध कराया जाएगा। इसके साथ ही जिले में कृषि तकनीकी हस्तांतरण को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से प्रत्येक राजस्व ग्राम स्तर पर एक कृषि जान दूत एवं पशु स्वास्थ्य कार्यकर्ता को चिन्हित कर प्रशिक्षित किए जाने का प्रस्ताव रखा गया। ये कार्यकर्ता कृषि विभाग एवं कृषि विज्ञान केंद्र के सहयोग से शासन की विभिन्न योजनाओं एवं नवीनतम कृषि तकनीकों को ग्राम स्तर तक पहुँचाने का कार्य करेंगे। इसके अतिरिक्त जिले में श्री अन्न (मिलेट्स) क्षेत्र विस्तार को प्रोत्साहित करने हेतु उत्पादित श्री अन्न के प्रसंस्करण एवं मूल्यवर्धन के लिए श्री अन्न प्रसंस्करण इकाई की स्थापना का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया, जिससे कृषकों को स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण की सुविधा उपलब्ध हो सके। इन तीनों प्रमुख योजनाओं से जिले की कृषि व्यवस्था को व्यापक लाभ प्राप्त होंगे। 1- ग्रीष्मकालीन दलहन उत्पादन तकनीक के माध्यम से जिले की कृषिगत भूमि का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित होगा। ग्रीष्मकालीन पड़त भूमि का उपयोग कर किसान अतिरिक्त आय अर्जित कर सकेंगे। दलहनी फसलों के कारण खेतों में नाइट्रोजन स्थिरीकरण होगा, जिससे आगामी फसलों के लिए आवश्यक रासायनिक उर्वरकों विशेषकर यूरिया की आवश्यकता में कमी आएगी। यह तकनीक किसानों के लिए कम लागत, पर्यावरण अनुकूल एवं लाभकारी सिद्ध होगी। साथ ही यह प्रयास देश द्वारा आयात किए जाने वाले दलहनों पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जाएगा। 2-कृषि ज्ञान दूत एवं पशु स्वास्थ्य कार्यकर्ता राजस्व ग्राम स्तर पर किसानों की जमीनी समस्याओं के समाधान हेतु विभाग एवं कृषकों के बीच सेतु के रूप में कार्य करेंगे। ये कार्यकर्ता नवीनतम कृषि एवं पशुपालन तकनीकों के प्रभावी वाहक बनकर विभागीय योजनाओं की जानकारी किसानों तक समयबद्ध रूप से पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। 3-श्री अन्न क्षेत्र विस्तार के अंतर्गत प्रस्तावित श्री अन्न प्रसंस्करण इकाई की स्थापना से कृषकों को स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण एवं मूल्यवर्धन की सुविधा प्राप्त होगी, जिससे उनके उत्पाद का बेहतर मूल्य प्राप्त होगा एवं किसानों की आय में वृद्धि सुनिश्चित होगी। उपरोक्त तीनों परियोजनाओं के संबंध में जिलाधिकारी महोदय द्वारा यह निर्देश प्रदान किए गए कि विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) एक सप्ताह के भीतर प्रस्तुत किया जाए, ताकि DPR प्राप्त होने के उपरांत अग्रिम आवश्यक कार्रवाही की जा सके। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी राजेश कुमार, उप कृषि निदेशक राज कुमार, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख कृषि विज्ञान केंद्र डॉ. राजेंद्र सिंह नेगी, परियोजना समन्वयक एवं वैज्ञानिक उत्तम कुमार त्रिपाठी, वैज्ञानिक, फसल उत्पादन विजय गौतम तथा जिला कृषि अधिकारी आर.पी. शुक्ला उपस्थित रहे।