हाजिरी पर चल रही है शिक्षा, पढ़ाई का सपना टूटा – पचपेड़वा में शिक्षा का बुरा हाल

निष्पक्ष जन अवलोकन। जनपद बलरामपुर के शिक्षा क्षेत्र पचपेड़वा में प्राथमिक विद्यालयों की हकीकत किसी से छिपी नहीं है। ग्राम पंचायत कंचनपुर स्थित प्राथमिक विद्यालय में रसोईया खुद इस बात की गवाही देती नज़र आई कि विद्यालय समय पर नहीं खुलता, कई दिनों तक बंद ही रहता है। रसोईया ने हाथ उठाकर कैमरे के सामने खुद तस्वीर खिंचवाकर यह स्वीकार किया कि विद्यालय नियमित रूप से संचालित नहीं हो रहा है। इसी तरह प्राथमिक विद्यालय बानगढ़ द्वितीया और धुबौलिया की हालत भी बदतर है। धुबौलिया विद्यालय मात्र एक घंटे खुलता है और उसके बाद ताला लग जाता है। वहीं ग्राम मोतीपुर हडहवा का विद्यालय केवल शिक्षामित्र के भरोसे चल रहा है। सूत्रों के मुताबिक न तो विद्यालयों में मिड डे मील समय से पकाया जाता है और न ही बच्चों को दूध उपलब्ध कराया जाता है। कभी-कभार तहरी बनाकर खानापूर्ति कर दी जाती है। विद्यालय न समय से खुलते हैं, न ही समय से बंद होते हैं। शिक्षा व्यवस्था के इस लापरवाह रवैये से बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो रहा है। जब संवाददाता ने संबंधित अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की तो पहले तो टालमटोल की गई, लेकिन बाद में सक्षम अधिकारी से बात होने पर उन्होंने कहा कि मीडिया टीम ने विद्यालय बंद दिखाने के लिए जबरदस्ती फोटो खिंचवाए हैं। उनका दावा है कि विद्यालय नियमित खुल रहा है। मास्टर साहब ने तो यहाँ तक सफाई दी कि कला बोर्ड दीवार पर लिखी तिथि गलती से अपडेट नहीं हो पाई थी। हालांकि ज़मीनी हकीकत इससे बिलकुल अलग तस्वीर बयां करती है। विद्यालयों में बच्चों के नाम पर सरकारी धन तो निकल रहा है लेकिन शिक्षा का स्तर रसातल में जा चुका है। बच्चों को मिलने वाला पोषण और शिक्षा दोनों ही कागज़ों तक सीमित हैं। यह तस्वीर प्रदेश के शिक्षा विकास के दावों पर बड़ा सवाल खड़ा करती है और ज़िम्मेदार विभाग की उदासीनता को उजागर करती हैं शिक्षा के नाम पर जारी यह लापरवाही और खानापूर्ति अगर जल्द नहीं रुकी तो आने वाली पीढ़ी का भविष्य बर्बादी की ओर जाएगा।