टोल अनुबंधों में स्टाम्प शुल्क अपवंचन पर बड़ी कार्रवाई, ₹2.72 करोड़ से अधिक की वसूली के आदेश
निष्पक्ष जन अवलोकन विनय सिंह बाराबंकी। जनपद में राजस्व हितों की सुरक्षा एवं कर अपवंचन पर प्रभावी नियंत्रण के उद्देश्य से जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी ने टोल अनुबंधों से जुड़े स्टाम्प शुल्क अपवंचन के दो मामलों में सख्त कार्रवाई करते हुए ₹2.72 करोड़ से अधिक की वसूली के आदेश दिए हैं। पहले प्रकरण में शहावपुर टोल प्लाजा के संचालन (जनवरी 2025 से जनवरी 2026) से जुड़े अनुबंध में प्रतिवादी शिवचन्द्र त्रिपाठी पर ₹1,17,73,920 की स्टाम्प शुल्क कमी और ₹11,77,000 जुर्माना लगाते हुए कुल ₹1,29,50,920 वसूली के आदेश दिए गए हैं। दूसरे प्रकरण में ग्राम बारा, तहसील हैदरगढ़ स्थित टोल के संचालन से जुड़े अनुबंध में कंपनी स्काईलार्क ई0ईजी0 प्रा0 लि0 पर ₹1,29,37,360 की स्टाम्प शुल्क कमी और ₹12,93,000 जुर्माना लगाते हुए कुल ₹1,42,30,360 की वसूली तय की गई है। जांच में पाया गया कि दोनों ही मामलों में करोड़ों के टोल अनुबंधों पर नियमानुसार देय स्टाम्प शुल्क के बजाय केवल ₹200 का ई-स्टाम्प लगाया गया। विधिक परीक्षण में यह स्पष्ट हुआ कि ऐसे अनुबंध ‘लीज (पट्टा)’ की श्रेणी में आते हैं, जिन पर निर्धारित दर से स्टाम्प शुल्क देय होता है। जिलाधिकारी न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनवाई का अवसर दिया, लेकिन संतोषजनक जवाब न मिलने पर अभिलेखों के आधार पर वसूली और जुर्माने के आदेश पारित किए गए। साथ ही निर्देश दिया गया है कि पूरी राशि ब्याज सहित निर्धारित समय में राजकोष में जमा कराई जाए। जिलाधिकारी ने कहा कि स्टाम्प शुल्क अपवंचन गंभीर वित्तीय अनियमितता है और ऐसे मामलों में शून्य सहनशीलता की नीति अपनाई जाएगी। --- क्या है मामला? पहले मामले में करीब ₹29.43 करोड़ के टोल अनुबंध पर मात्र ₹200 का स्टाम्प शुल्क जमा किया गया, जबकि नियमानुसार ₹1.17 करोड़ से अधिक शुल्क देय था। वहीं, दूसरे मामले में लगभग ₹64.68 करोड़ के अनुबंध पर भी सिर्फ ₹200 का स्टाम्प शुल्क अदा किया गया, जबकि ₹1.29 करोड़ से अधिक शुल्क देय था। दोनों मामलों में भारी स्टाम्प शुल्क की कमी पाए जाने पर प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए वसूली और जुर्माने के आदेश जारी किए हैं।









