ग्राम कुम्हा में शिव मंदिर पुनर्निर्माण के बाद भागवत कथा का भव्य आयोजन, 16 मई को विशाल भंडारा

ग्राम कुम्हा में शिव मंदिर पुनर्निर्माण के बाद भागवत कथा का भव्य आयोजन, 16 मई को विशाल भंडारा

निष्पक्ष जन अवलोकन

राहुल शर्मा

मथुरा। जनपद मथुरा के ग्राम कुम्हा में नव पुनर्निर्मित शिव मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के उपरांत धार्मिक और आध्यात्मिक वातावरण अत्यंत भक्तिमय हो गया है। मंदिर के पुनर्निर्माण के बाद अब यहां श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का भव्य आयोजन किया जा रहा है, जिसमें प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर कथा श्रवण कर धर्म लाभ अर्जित कर रहे हैं। ग्रामवासियों के सामूहिक सहयोग और अथक प्रयासों से शिव मंदिर का पुनर्निर्माण कराया गया, जो समय के साथ जर्जर और नीचा पड़ गया था। गांव के लोगों ने एकजुट होकर इस प्राचीन आस्था स्थल को पुनः भव्य स्वरूप देने का संकल्प लिया, जो आज साकार हो चुका है। मंदिर में विधि-विधान के साथ प्राण प्रतिष्ठा संपन्न होने के बाद अब पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल बना हुआ है। इस पावन अवसर पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में प्रसिद्ध कथा वाचक कथा शास्त्री मनोज शास्त्री जी अपनी मधुर वाणी से श्रद्धालुओं को भक्ति, ज्ञान और धर्म का अमृतपान करा रहे हैं। उनकी कथा में भगवान की लीलाओं, धर्म के महत्व और जीवन में संस्कारों की आवश्यकता पर प्रकाश डाला जा रहा है, जिससे श्रद्धालु भाव-विभोर हो रहे हैं। प्रतिदिन कथा स्थल पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है, जहां भक्तजन भक्ति और ज्ञान के इस यज्ञ में सहभागी बन रहे हैं। वातावरण हर-हर महादेव और जय श्री कृष्ण के जयघोषों से गूंज रहा है। आयोजन समिति द्वारा श्रद्धालुओं के लिए समुचित व्यवस्थाएं भी की गई हैं, जिससे सभी भक्तजन सहजता से कथा का आनंद ले सकें। आयोजन समिति एवं समस्त ग्रामवासियों ने जनपद मथुरा सहित आसपास के क्षेत्रों की जनता से विनम्र निवेदन किया है कि वे अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर इस दिव्य ज्ञान यज्ञ में शामिल हों और आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करें। आयोजन के अंतर्गत 16 मई को विशाल भंडारे का भी आयोजन किया जाएगा, जिसमें सभी श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद ग्रहण करने की व्यवस्था रहेगी। समिति ने सभी धर्मप्रेमी बंधुओं से अनुरोध किया है कि वे परिवार सहित उपस्थित होकर भगवान शिव एवं श्रीहरि की कृपा प्राप्त करें तथा इस धार्मिक आयोजन को सफल बनाएं। ग्राम कुम्हा में चल रहा यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बना हुआ है, बल्कि गांव की एकता, श्रद्धा और सनातन संस्कृति के प्रति समर्पण का भी प्रेरणादायक